Online fraud : ऐसे चलता है ऑनलाइन ठग गिरोह का नेटवर्क, जानकर चौंक जाएंगे...

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जोधपुर।
ऑनलाइन ठगी (Online fraud gang) में लिप्त गिरोह बड़े ही पेशेवर तरीके से वारदात को अंजाम देते हैं। तीन स्तर पर गिरोह सक्रिय होता है और राशि मिलने के बाद उसका बंटवारा भी होता है। आश्चयर्जनक बात तो यह है कि बीमा कम्पनियों में काम करने वाले कुछ व्यक्ति कमीशन के लालच में ग्राहकों के डाटा लीक (Insurance company's some employee are leadking datas of customer) करते हैं। आगरा से पकड़ में आने वाले ठग गिरोह के सात युवकों से देवनगर थाना पुलिस (Police station Devnagar) की पूछताछ में यह सामने आया है।
कम्पनियों से होते हैं डाटा लीक
थानाधिकारी जयकिशन सोनी का कहना है कि शिक्षिका से पचास लाख रुपए ठगी करने के मामले में उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद निवासी राहुल सिंह, आशीष जाटव, संदीप कुमार, दिल्ली में लक्ष्मीनगर निवासी शहवान, यूपी में कासगंज निवासी साहिब खान, तौसिफ खान उर्फ तौजिफ उर्फ तुआज्जिब खान और हरियाणा में फरीदाबाद निवासी बबलू पासवान रिमाण्ड पर हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है। बीमा पॉलिसी मैच्योर होने का झांसा देकर आरोपी आमजन से ठगी करते हैं। बीमा कम्पनियों में काम करने वाले अथवा काम कर चुके कुछ लोग इनके साथ मिले हुए होते हैं। जो इन्हें बीमा पॉलिसी धारकों के डाटा लीक करते हैं।
बड़े स्तर पर सक्रिय है ठग गिरोह
पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन ठग गिरोह दिल्ली, यूपी के गाजियाबाद व अन्य शहराें में बड़े स्तर पर सक्रिय है। जो फ्लैट या ऑफिस आदि किराए पर लेकर गिरोह का संचालन करते हैं।
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गिरोह में तीन स्तर पर होता है काम
1- कॉलिंग पार्टी
इसमें वे लोग शामिल होते हैं जो बीमा कम्पनियों से मिलने वाले डाटा से मोबाइल नम्बर व अन्य जानकारियों से ग्राहकों को फोन कर विभिन्न तरीकों से झांसे में लेते हैं। ग्राहक के फंसने पर उन्हें बैंक खाता नम्बर दिए जाते हैं जिनमें ठगी की राशि जमा कराई जानी होती है।
2- फेक बैंक खाता धारक
ठग गिरोह ऐसे लोगों को पकड़ते हैं जो अपने दस्तावेज सरगना को देकर बैंक खाता खुलवाते हैं। एक तरह से वो अपना बैंक खाता किराए पर दे देते हैं। गिरोह सरगना खाते के बदले हस्ताक्षरशुदा चेक, पास बुक व अन्य दस्तावेज अपने पास रखता है। ताकि खाते में रुपए जमा होते ही वो निकाल लेता है।
3- टीम लीडर यानि टीएल
यह व्यक्ति गिरोह सरगना होता है। जो कॉलिंग पार्टी व फेक बैंक खाता धारकों के बीच समन्वय स्थापिता करता है। यह व्यक्ति दोनों पक्षों को कभी मिलने नहीं देता है। न ही वो खुद इनसे मिलता है। सिर्फ मोबाइल पर ही बात होती है।
सबसे अधिक हिस्सा कॉलिंग पार्टी का
चूंकि कॉलिंग पार्टी किसी भी व्यक्ति को झांसे में लेने का काम करती है। इसलिए ठगी की राशि में उसका सबसे बड़ा हिस्सा होता है। उसे 70 प्रतिशत तक रुपए दिए जाते हैं। खाता धारक को 5-10 प्रतिशत और टीएल 20-25 प्रतिशत रुपए लेता है।
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पत्रिका अलर्ट : अनजान कॉल के झांसे में न आएं
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि बीमा पॉलिसी के नाम व अन्य के संबंध में आने वाले अनजान कॉल के झांसे में न आएं। ठग गिरोह विभिन्न तरह की बातों में लेकर आमजन को ठगी में फांस लेते हैं।



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