जोधपुर.गायों में फैल रही लंपी स्किन बीमारी के अभी मनुष्यों में किसी प्रकार के प्रभाव नजर नहीं आए हैं, लेकिन ऐहतियात के तौर पर चिकित्सकों की सलाह है कि जानवरों में फैली बीमारी तक घरों में लाए जाने वाले दूध को सात से आठ बार उबाल जरूर लें, उसके बाद ही दूध का सेवन करें। हालांकि अभी तक इस बीमारी के लक्षण किसी इंसान में नहीं मिले हैं, फिर भी चिकित्सक सलाह के तौर पर ध्यान देने पर जोर दे रहे हैं।
लंपी स्किन एक वायरल डिजीज है, जो पशुओं को प्रभावित करती है. आमतौर पर यह खून चूसने वाले कीड़ों, मच्छर की कुछ प्रजातियों और पशुओं के कीड़े (टिक्स) के काटने से फैलती है। यह बीमारी संक्रमित पशु से दूसरे पशुओं में तेजी से फैल जाती है। इसकी चपेट में आने वाले पशुओं को बुखार आता है और स्किन पर जगह जगह निशान बन जाते हैं। गंभीर स्थिति होने पर पशु मर जाते हैं। इस बीमारी से बचने के लिए पशुओं को वैक्सीन लगवानी चाहिए, हालांकि अभी तक इसका कोई सटीक इलाज नहीं है. लक्षणों के आधार पर पशु चिकित्सक इलाज कर रहे हैं।
हमें ध्यान देने की जरूरत
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. नवीन किशोरिया बताते हैं कि लंपी स्किन डिजीज पशुओं में फैलने वाली बीमारी है, यह गाय, भैंस, बकरी और भेड़ में तेजी से फैल सकती है। अगर इंसानों की बात करें तो उनमें यह बीमारी फैलने का खतरा न के बराबर है। हालांकि पशुओं को छूने के बाद सभी लोगों को साबुन से अच्छी तरह हाथ धो लेने चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि अपने पशुओं को इस संक्रमण से बचाया जा सके. इंसानों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। पशुओं को समय पर वैक्सीन लगवाकर इस डिजीज का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा दूध की खरीदारी भी विश्वसनीय स्थानों से करें, ये भी देख लेना चाहिए कि जिन बाड़ों की गायों में ये बीमारी हैं, वहां का दूध फिलहाल घर न मंगवाए।
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