जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) में वर्ष 2012-13 मेें हुई शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी की जांच के लिए गठित जांच समिति 30 महीने बाद भी खाली हाथ है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बी.एम. शर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति का कार्यकाल पांच बार बढ़ाया जा चुका है। पांचवां कार्यकाल तीस जून को समाप्त हो गया। समिति ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी। सरकार फिर से छठी बार कार्यकाल बढ़ाएगी, इसको लेकर संशय है।
गहलोत सरकार ने जेएनवीयू शिक्षक भर्ती में शामिल शिक्षकों के ही निवेदन पर दिसम्बर 2019 में प्रो. शर्मा कमेटी का गठन किया था। इससे पहले वर्ष 2017 में कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पी.के. दशोरा की जांच समिति बनाई गई थी, जिसकी जांच में भर्ती में गड़बडिय़ां उजागर हो गई। दशोरा कमेटी की रिपोर्ट को सरकार ने लागू किए बगैर ही नई जांच समिति बना दी जो अब तक जांच ही कर रही है।
शिक्षक तो स्थाई हो गए, जांच पर ही उठ रहे सवाल
उधर प्रो. शर्मा समिति की जांच के दौरान ही जेएनवीयू ने गत वर्ष सभी 114 असिस्टेंट प्रोफेसर को स्थाई कर दिया। राजभवन के आदेश से बर्खास्त 34 शिक्षकों को भी बहाल कर दिया। सभी 154 शिक्षकों ने एसीबी के डर से जनवरी से मार्च 2017 में जो बंक मारा था, वह सर्विस कट भी रेगुलर कर दिया गया। सातवां वेतन आयोग, सीएएस पदोन्नति, एरियर सहित विभिन्न लाभ बांट दिए।
दस साल पहले हुई थी भर्ती
जेेएनवीयू में वर्ष 2012-13 में 154 शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसमें 114 असिस्टेंट प्रोफेसर थे। शेष एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर्स थे। दशोरा कमेटी ने असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में भारी गड़बड़ी मानी थी। जून 2018 में राजभवन ने जेएनवीयू को दशोरा कमेटी की रिपोर्ट को सिण्डीकेट में रखने को कहा, लेकिन विवि ने अब तक नहीं रखा। सरकार बदलते ही नवम्बर 2019 में प्रो शर्मा की नई जांच कमेटी गठित कर दी और पुरानी कमेटी को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
(मामले में जांच समिति अध्यक्ष आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष प्रो.बी.एम. शर्मा से प्रतिक्रिया जाननी चाही, लेकिन कई बार कॉल करने के बावजूद उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।)
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