प्रदेश के इस विश्वविद्यालय को लगेगा राजस्व का झटका, ये है कारण

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जोधपुर. जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के जालोर और बाड़मेर से सम्बद्ध 159 कॉलेज शुक्रवार से एमबीएम विश्वविद्यालय के अधीन आ जाएंगे। इससे व्यास विश्वविद्यालय में एक साथ करीब 50,000 विद्यार्थियों की कमी हो जाएगी। साथ ही राजस्व भी लगभग आधा रह जाएगा।


व्यास विश्वविद्यालय वर्ष 2013 में संभागीय विश्वविद्यालय बना था तब जालौर, बाड़मेर, जैसलमेर, पाली और जोधपुर जिले के कॉलेजों को इससे संबद्ध किया गया था। गत वर्ष एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से एमबीएम विश्वविद्यालय बना। राज्य सरकार ने पिछले महीने जालोर और बाड़मेर के कॉलेजों को एमबीएम विश्वविद्यालय को सौंप दिया। जेएनवीयू में वर्तमान में करीब 1 लाख 50 हजार विद्यार्थी है जिसमें से 50 हजार विद्यार्थी स्वयंपाठी है। नियमित विद्यार्थियों की संख्या एक लाख है। अब जेएनवीयू व एमबीएम विवि में पचास-पचास हजार विद्यार्थी हो जाएंगे। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के जालोर और बाड़मेर से सम्बद्ध 159 कॉलेज शुक्रवार से एमबीएम विश्वविद्यालय के अधीन आ जाएंगे। इससे व्यास विश्वविद्यालय में एक साथ करीब 50,000 विद्यार्थियों की कमी हो जाएगी। साथ ही राजस्व भी लगभग आधा रह जाएगा।


अब तक 378 कॉलेज थे
जेएनवीयू में अब तक 378 कॉलेज थे। इसमें करीब 90 बीएड कॉलेज है। जालोर और बाड़मेर में काॅलेजों की संख्या अधिक होने के साथ वहां विद्यार्थियों की संख्या भी अधिक है।


कॉलेजों की बैठक स्थगित
एक जुलाई से एमबीएम विश्वविद्यालय के साथ आ रहे जालोर और बाड़मेर के कॉलेजों के संस्था प्रधानों की बैठक शुक्रवार को आयोजित की जानी थी लेकिन प्रदेश में धारा 144 लागू होने की वजह से अब यह स्थगित कर दी गई है। संभवत: अगले सप्ताह बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें एमबीएम विश्वविद्यालय जालौर और बाड़मेर के कॉलेजों के साथ नए नियमों को लेकर चर्चा करेगा।



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