Negligence : विज्ञान की शिक्षा जेब पर भारी,पीजी को तरसी छात्राएं

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-पीपाड़सिटी राजकीय कन्या महाविद्यालय

-सरकार की उपेक्षा से भामाशाहों के अरमानों पर फिरा पानी

पीपाड़सिटी (जोधपुर). सरकार की बालिका उच्च शिक्षा के प्रति उदासीनता अब छात्राओं पर भारी पड़ने लगी है।इससे उनका स्नातकोत्तर शिक्षा का सपना पूरा नही हो सका, वहीं विज्ञान विषय में डिग्री हासिल करना भी जेब पर पड़ रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने जोधपुर संभाग में भामाशाहों की मांग पर ग्रामीण क्षेत्र में यहां प्रथम राजकीय कन्या महाविद्यालय को स्वीकृति प्रदान की।

इसके भवन निर्माण, भूमि के साथ अन्य सुविधाओं को विकसित करने के लिए तीन वर्ष तक शिक्षा विकास समिति ने दो करोड़ रुपए जनसहयोग से एकत्रित कर बालिकाओं के उच्च शिक्षा के सपने को मूर्त रूप देते हुए सन 1997 में इस कॉलेज को शुरू किया।

तीन वर्ष तक अपने खर्च से कॉलेज का संचालन कर राज्य सरकार को नियमित करने के लिए सुपुर्द किया लेकिन तब से आज तक ये कॉलेज राज्य सरकार की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

सरकार ने इस राजकीय कन्या महाविद्यालय को बालिका शिक्षा क्षेत्र में आदर्श बनाने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए,इस कारण भामाशाह भी दुर्दशा देखकर आंसू बहा रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे इसी कॉलेज के परिसर के खेल मैदान में कई बार हेलीकॉप्टर से उतर चुके हैं और जनसुनवाई भी कर चुके हैं, फिर भी महाविद्यालय उपेक्षित है।

छात्राओं में नाराजगी

कॉलेज की समस्याओं के समाधान को कॉलेज स्थापना से कई बार छात्राएं सड़कों पर उतरी, ज्ञापन भी दिए फिर भी बालिकाओं की फरियाद अनसुनी ही दिखी।

ये हैं हालात

कॉलेज स्थापना की सिल्वर जुबली होने के बाद भी स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति नहीं होने से कार्यवाहक व्यवस्था ही चल रही है।इस कारण कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था भी कई बार चरमरा जाती है। सह आचार्यों के साथ लेखा व मंत्रालयिक स्टाफ के स्वीकृत पद भी नहीं भरे गए।महत्वपूर्ण विषयों में विद्या सम्बल योजना में सह आचार्यों और अन्य में संविदा कार्मिकों के सहारे काम चलाया जा रहा है।

जेब पर भारी विज्ञान की शिक्षा

राज्य सरकार ने छात्राओं में वैज्ञानिक सोच पैदा करने के लिए सन 1917-18 में विज्ञान संकाय को स्व वित्त पोषित योजना में स्वीकृत देकर चार वर्ष बाद भी इसे नियमित नही किया। इस कारण छात्राओं को प्रति वर्ष करीब दस हजार रुपए खर्च कर विज्ञान की शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है जबकि नियमानुसार तीन वर्ष बाद सरकार को ऐसे संकाय को नियमित करने का प्रावधान हैं।

नहीं मिला पीजी का दर्जा

कॉलेज को अब तक स्नातकोत्तर शिक्षा का दर्जा नहीं मिला, जबकि कला, विज्ञान व वाणिज्य संकाय में ग्यारह सौ से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। उनको स्नातकोत्तर शिक्षा नहीं मिलने से या तो पीजी के सपने को दिल में दफन करना पड़ता हैं या जोधपुर में जाकर भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है।

फैक्ट फाइल

छात्राएं

कला -888

वाणिज्य -57

विज्ञान -209

रिक्त पद

प्राचार्य -1

सहायक आचार्य-

हिंदी-2021 से

इतिहास-2014 से

व्यावसायिक प्रशासन-2019 से

अन्य रिक्त पद

सहायक लेखाधिकारी 1

वरिष्ठ सहायक 1

कनिष्ठ सहायक 2

पीटीआई 1

लेब बॉय 1

इन्होंने कहा
कॉलेज में रिक्त पदों की जानकारी से समय-समय उच्च शिक्षा निदेशालय को अवगत कराया जाता हैं।
डॉ.नीना जैन, कार्यवाहक प्राचार्य।

मुख्यमंत्री के दूसरे घर के महिला कॉलेज की दुर्दशा गहलोत सरकार के बालिका शिक्षा में कथनी करणी के भेद का ज्वलंत उदाहरण हैं।
-कमसा मेघवाल, पूर्व राज्यमंत्री, रतकुड़िया।

गर्ल्स कॉलेज की शैक्षणिक समस्याओं को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री का ध्यान आकर्षित किया गया हैं, नए सत्र में सुधार की सम्भावना हैं।
-हीराराम मेघवाल, विधायक।



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