Fintech Degree: जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के लेखांकन विभाग ने इस साल से फिनटैक विषय शुरू करने की घोषणा की है। बीकॉम में एकाउंटिंग के साथ फिनटैक विषय ले सकेंगे। इसके अलावा डिप्लोमा इन फिनटैक व एकाउंटिंग भी शुरू किया जा रहा है। दोनों स्ववित्त पोषी पाठ्यक्रम होंगे। फिनटैक में डिग्री व डिप्लोमा के बाद बैंक, बीमा और कम्पनी के विभिन्न स्तर पर आसानी से रोजगार मिल सकेगा।
बीकॉम फिनटैक में कुल छह सेमेस्टर होंगे। प्रत्येक सेमेस्टर में 6 विषय है। इनके साप्ताहिक चार क्रेडिट होंगे। डिप्लोमा में दो सेमेस्टर हैं। प्रत्येक विषय के यहां भी चार क्रेडिट हैं। दोनों कोर्स में कोई भी 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी (कला, वाणिज्य एवं विज्ञान) प्रवेश ले सकता है।
बढ़ रही है फिनटैक पेशेवरों की मांग
लेखांकन विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि लेखांकन एवं वित्तीय सेवा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका फिनटैक है। इसमें लागत को कम करने, दक्षता में सुधार करने एवं बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए नई वित्तीय तकनीकों का उपयोग करके उत्पादन से लेकर अन्तिम सेवाओं को बेहतर तरीके से प्रदान करना है। इसी सन्दर्भ में कागज रहित ऋण व्यवस्था, मोबाइल बैंकिंग, सुरक्षित पेमेन्ट गेटवे, मोबाइल वॉलेट और कृत्रिम बृद्धिमता आधारित भुगतान के तरीके हैं।
69 सीटों पर बीएससी होम साइंस
प्रो. पवन कसेरा ने बताया कि विवि ने इस साल से 69 सीटों पर बीएससी होम साइंस वापस शुरू करने का निर्णय किया है। तीस साल से चले आ रहे इस पाठ्यक्रम को गत वर्ष आवेदन पत्र कम आने पर बंद कर दिया गया था। विवि में बीए होम साइंस पहले से संचालित है, जिसे सेवानिवृत्त शिक्षकों और गेस्ट फैकल्टी के द्वारा पढ़ाया जा रहा है। बीएससी होम साइंस में कुल 69 सीटें हैं। शिक्षक नहीं होने से होम साइंस में स्नातकोत्तर पिछले चार वर्षों से बंद है। शिक्षकों की भर्ती होने पर पीजी शुरू की जाएगी।
आवेदन शुरू, खुद भरें वरियता क्रम
विवि में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए आवेदन प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई। विवि प्रशासन ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे विषय का चुनाव करते समय आवेदन पत्र पर स्वयं टिक लगाएं। ई-मित्र संचालक के भरोसे नहीं रहे। उदाहरण के तौर पर बीए के समस्त 18 विषयों का वरियता क्रम स्वयं भरें। प्राप्तांकों के आधार पर विद्यार्थियों को विषय दिए जाएंगे।
इस समय सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि छात्र छात्राएं ई-मित्र के भरोसे आवेदन पत्र भर रहे हैं। वरियता क्रम ढंग से नहीं भरते, जिसके चलते उन्हें वह विषय आवंटित हो जाता है जो लेना नहीं चाहते।
- प्रो.संगीता लुंकड़, निदेशक, केएन कॉलेज
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