जोधपुर। बीएड डिग्री धारकों को राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) स्तर प्रथम के लिए योग्य नहीं माने जाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का विस्तृत फैसला बुधवार को अपलोड हुआ। कोर्ट ने नेशनल कौंसिल फ़ॉर टीचर एज्युकेशन (एनसीटीई) की 28 जून 2018 की अधिसूचना को कई कारण बताते हुए गैरकानूनी घोषित किया है।
मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी व न्यायाधीश सुदेश बंसल की खंडपीठ ने बीएड डिग्रीधारियों के खिलाफ फैसला देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर आरटीई अधिनियम की धारा 23 की उपधारा 1 के तहत यह अधिसूचना जारी की गई थी। इसकी शक्तियां केन्द्र के पास नहीं थी। कोर्ट ने हालांकि अधिसूचना को गैरकानूनी बताया है, लेकिन यह भी कहा कि राज्य सरकार ने रीट के लिए विज्ञापन जारी करते समय अधिसूचना को नजरअदांज किया, जो उसे नहीं करना चाहिए था। अब अधिसूचना को अवैध घोषित कर दिया गया है। इसीलिए राज्य सरकार का यह कृत्य अकादमिक महत्व का रह गया है।
बीएड डिग्री धारकों को राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) स्तर प्रथम के लिए योग्य नहीं माने जाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का विस्तृत फैसला बुधवार को अपलोड हुआ। कोर्ट ने नेशनल कौंसिल फ़ॉर टीचर एज्युकेशन (एनसीटीई) की 28 जून 2018 की अधिसूचना को कई कारण बताते हुए गैरकानूनी घोषित किया है।
कोर्ट ने डीएलएड (एनआईओएस) धारकों की पात्रता को लेकर इस फैसले में कोई निर्णय नहीं दिया है। उल्लेखनीय है कि इस विषय पर एकलपीठ में मामले लम्बित है।
कोर्ट ने हालांकि अधिसूचना को गैरकानूनी बताया है, लेकिन यह भी कहा कि राज्य सरकार ने रीट के लिए विज्ञापन जारी करते समय अधिसूचना को नजरअदांज किया, जो उसे नहीं करना चाहिए था। अब अधिसूचना को अवैध घोषित कर दिया गया है। इसीलिए राज्य सरकार का यह कृत्य अकादमिक महत्व का रह गया है।
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