जोधपुर. मूक बधिर और दुर्घटना में अपनी आवाज खोने वाले व्यक्तियों के लिए जोधपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने बोलने वाले दस्ताने (टॉकिंग ग्लव्ज) विकसित किए हैं। ये दस्ताने मूक-बधिरों की आवाज बनेंगे। दस्ताने पहनने वाला व्यक्ति अंगुली, अंगूठा, हाथ अथवा कलाई से संबंधित शब्द हवा में उकेरेगा या इशारा करेगा तो इससे जनरेट होने वाले इलेक्ट्रिक सिग्नल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग की सहायता से ऑडियो सिग्नल में बदल जाएंगे और एक आडियो ट्रांसमीटर के जरिए ध्वनि आएगी। दस्तानों का वजन मोबाइल के वजन के बराबर ही है। इसकी कीमत भी केवल 5 हजार रुपए ही है।
आइआइटी जोधपुर के कंप्यूटर विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुमित कालरा, डॉ अर्पित खंडेलवाल, एम्स जोधपुर के नाक, कान, गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ अमित गोयल, सीनियर रेजिडेंट डॉ नितिन प्रकाश नायर और फिजियोलॉजी विभाग के डॉ अभिनव दीक्षित ने मिलकर ये दस्ताने बनाए हैं। दस्तानों का हाल ही पेटेंट भी हो चुका है।
ऐसे काम करते हैं दस्ताने
दस्तानों की इलेक्ट्रिकल वायरिंग विद्युत संकेत ग्रहण करती है। इसके अंदर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के प्रोग्राम डाले गए हैं। दस्तानों को ऊर्जा देने के लिए एक बैटरी भी है। दस्तानों के मूवमेंट से सिग्नल उत्पन्न होते हैं जो प्रोसेसिंग यूनिट में जाकर एल्गोरिदम की सहायता से ध्वनि में बदलते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार की भाषाओं के वर्ण यथा हिंदी, अंग्रेजी, फ्रेंच, मारवाड़ी के डाले गए हैं। सामान्यत: दस्तानें सभी प्रकार की भाषाएं बोल पाने में सक्षम है।
डिवाइस से दे सकेंगे भाषण
वर्तमान में इस डिवाइस की गति कुछ कम है। अब दोनों संस्थान मिलकर इसकी गति बढ़ाने के लिए शोध कर रहे हैं ताकि मूक बधिर लोग सामान्य व्यक्ति की तरह तेजी से बातचीत करने के साथ मंच खड़ा होकर भाषण भी दे सकें।
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