बस लपटों से घिरने से पहले खिड़की से कूद बचाई जान

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जोधपुर. बस चल रही थी। मैं पीछे की सीट पर बैठा था। अंदर एकदम धमाके की आवाज हुई, तो मैं चौंक गया। आगे देखा तो धुआं-धुआं सा दिखाई दिया। लोग चीखे कि एक्सीडेंट हो गया है। पीछे घूमकर देखा तो बस के कांच टूट गए। मैं बिना सोचे समझे बस से ही कूद गया। कितने फीट कूदा, इतना याद तो नहीं, लेकिन उठकर चल नहीं पाया। पैर की हड्डी टूट गई।

यह कहते हुए जालोर के सांचौर निवासी शाहरुख (२५) का चेहरा खौफ से पीला पड़ गया। बालोतरा के निकट बुधवार सुबह हुए भीषण हादसे में घायल शाहरुख को अन्य लोगों के साथ जोधपुर रैफर किया गया। घायलों में उसके ताऊ भी हैं। ब्याह-शादियों में ढोलक बजाने का काम करने वाला शाहरुख अपने ताऊ के साथ जोधपुर में किसी विवाह समारोह में ढोलक बजाने के लिए आ रहा था। इसी दौरान सुबह करीब साढ़े दस बजे बालोतरा से थोड़ा आगे हुई भीषण दुर्घटना का शिकार हो गया।

शाहरुख बताता है कि धमाके के बाद चारों ओर कोहराम मच गया। बस के अगले हिस्से में लगी आग तेजी से पीछे की ओर फैली। गनीमत रही कि वह खिड़की से कूद गया। उसके बड़े पिता ने भी खिड़की से कूदकर जान बचाई।

देखते ही देखते आग का गोला बन गई बस

जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए शाहरुख ने ट्रोमा सेंटर में पत्रिका से बातचीत में कहा कि उसने जीवन में ऐसा भयानक हादसा नहीं देखा। वह मंजर याद आते ही उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है। वह ज्यादा बात करने की स्थिति में नहीं था, लेकिन हिम्मत जुटाकर बोला कि हादसा होने के कुछ देर बाद ही बस आग का गोला बन गई। उसे व उसके ताऊ को लोगों ने खींचकर अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद क्या हुआ, उसे याद नहीं है। वह बताता है कि बस में कई बच्चे भी सवार थे। कुछ लोगों ने उसकी तरह कूद कर जान बचाई होगी। बाकी कई लोग तो बस में जिंदा ही जल गए।

जोधपुर में ६ घायलों का इलाज

हादसे के बाद बालोतरा से छह घायलों को जोधपुर रैफर किया गया है। इनमें से तीन का इलाज मथुरादास माथुर अस्पताल और तीन का उपचार महात्मा गांधी अस्पताल में किया जा रहा है।



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