जोधपुर. जिले के खेजड़ली के रेस्क्यू सेंटर में पिछले एक सप्ताह में 17 से अधिक ब्लेक बक, चिंकारों व नीलगाय के बच्चों की मौत 'गलघोंटूÓ संक्रमण से हो चुकी है। इनमें 6 चिंकारे, 5 ब्लेक बक और 6 नीलगाय के बच्चे शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्व भर में मिसाल जोधपुर जिले के खेजड़ली के आसपास विभिन्न वन्यजीव बहुल क्षेत्रों से उपचार के लाए घायल वन्यजीव भी बैक्टिरियल इंफेक्शन की चपेट में आने से प्रभावित हुए है। खेजड़ली में एक के बाद एक लगातार स्वस्थ हरिणों की लगातार मौत के बाद वन अधिकारी व चिकित्सक मौके पर पहुंचे और गंभीर बीमार वन्यजीवों को अलग अलग रखकर चारे व पानी के माध्यम से 'गलघोंटूÓ बीमारी रोकथाम के लिए एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा रही है।
जांच के लिए बुलाए विशेषज्ञ
उपवन संरक्षक वन्यजीव विजय बोराणा ने बताया कि खेजड़ली अस्थाई रेस्क्यू सेंटर में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों डॉ. हेमंत जोशी और डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ को भी बुलाया गया है। माचिया जैविक उद्यान के वन्यजीव चिकित्सक ज्ञानप्रकाश भी लगातार मामले की मॉनेटरिंग कर रहे हैं। उपवन संरक्षक ने बताया कि दरअसल गलघोंटू बीमारी पिछले माह तिलवासनी में फैली थी जहां से खेजड़ली में संचालित अस्थाई रेस्क्यू सेंटर में लाए गए बीमार वन्यजीवों से दूसरे वन्यजीव भी संक्रमण की चपेट में आए है। हालांकि अब वन्यजीवों को उन्हें अलग अलग रखा जा रहा है। रेस्क्यू सेंटर में नि:शुल्क सेवाएं देने वाले घेवरराम गोदारा ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में 6 चिंकारे, 5 ब्लेक बक और 6 नीलगाय के बच्चे संक्रमण से काल कवलित हो चुके है। वन्यजीवों बचाने के लिए रामस्वरूप खावा, श्याम गोदारा, महंत शंकरदास,अशोक गोदारा आदि सेवाएं दे रहे है।
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