जोधपुर. थार में वृहद स्तर पर खजूर की मेडजुल और खुनेजी वैरायटियों से लकदक पेड़ दिखने के बाद अब अंजीर की बारी है। जोधपुर, सिरोही और बाड़मेर के कई किसानों ने खेतों में अंजीर की वैरायटी ‘डायना’ उगाई है। थार की अद्र्ध शुष्क होती जलवायु के म²ेनजर केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने अंजीर की खेती के मापदण्ड (पैकेज्ज ऑफ प्रेक्टिस) स्थापित करने शोध शुरू किया है।
काजरी के खेत में उगाए गए डायना के 265 पौधों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। दो-चार साल बाद काजरी अंजीर की खेती के लिए आवश्यक तत्वों से किसानों को अवगत करा देगा। इसके बाद मध्य-पूर्वी देशों से अंजीर के आयात की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वर्तमान में भारत में तुर्की से अंजीर का बड़े पैमाने पर मंगवाया जाता है। गत वर्ष भी 10 से 12 मैट्रिट टन अंजीर आयात हुई थी।
एक पेड़ से 10 किलो अंजीर
काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अकथ सिंह के अनुसार काजरी ने दो महीने पहले टिश्यू कल्चर तकनीक से अंजीर के पौधे लगाए हैं। इसमें बूंद-बंद सिंचाई पद्धति से पानी दिया जा रहा है। दो साल बाद फल बनना शुरू होगा। चौथे साल में भरपूर उत्पादन होगा। एक पेड़ से करीब दस किलो अंजीर मिल जाएगी।
अभी महाराष्ट्र समेत तीन राज्यों में खेती
अंजीर भी अद्र्ध शुष्क जलवायु का पौधा है। वर्तमान में यह महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक राज्यों में उगाया जा रहा है। एक हेक्टेयर में 700 से 800 पौधे लगते हैं। दिसम्बर से मार्च के दौरान हार्वेस्टिंग की जाती है। तुर्की में सर्वाधिक 305 टन उत्पादन होता है। मिस्र, अल्जीरिया, ईरान, मोरक्को व सीरिया भी अंजीर केप्रमुख उत्पादक देशों में है।
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
अंजीर डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद है। इसमें कई सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्व व फाइबर होते हैं। सर्दियों में इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है।
...........
‘अंजीर अद्र्ध शुष्क जलवायु का पौधा है, इसलिए काजरी की ओर से अब अंजीर की खेती के लिए पेकेज्ज ऑफ प्रेक्टिस विकसित किया जा रहा है।’
-डॉ ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3uFbDjW
0 comments:
Post a Comment