प्रदूषण के खिलाफ हथियार बन सकता है ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ सिस्टम

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अविनाश केवलिया. जोधपुर.

हमारा शहर वायु प्रदूषण के लिहाज से हमेशा से ही रेड जोन में रहा है। पीएम-10 का स्तर 120 से ऊपर ही चल रहा है। जो कि देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से एक है। इसका बड़ा कारण यहां का वातावरण या क्लाइमेट भी है। लेकिन आने वाले दिनों में पीएम-2.5 का प्रदूषण स्तर बढऩा चिंता का विषय हो सकता है। वर्तमान में यह भी 120-130 के बीच रहता है। इसका कारण वाहनों का प्रदूषण हो सकता है। एक ओर सरकार ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम यानि ई-वाहनों को प्रमोट कर रही है, लेकिन हमारे शहर में फिलहाल इसको लेकर कोई कार्ययोजना नहीं है।
शहर की बढ़ती जनसंख्या, विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आगामी दिनों में वाहनों का प्रदूषण और बढऩे की आशंका है। ऐसे में ई-वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग व सार्वजनिक परिवहन के साधनों का भी ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ओर जाना जरूरी है। इसके लिए फिलहाल स्थानीय स्तर पर कोई पॉलिसी या रूट मैप नहीं है। लेकिन यदि प्रशासन इसके लिए प्रयास करे तो यह हमारे प्रदूषण स्तर को कम करने के साथ ही जाम की समस्या व पर्यटकों के लिए भी सुविधाजनक हो सकता है। सरकार ने यह की है घोषणा

ई-वाहनों के चार्जिंग पॉइंट खोलने के लिए यदि कोई जमीन के लिए आवेदन करता है तो उसको दर में 50 प्रतिशत छूट दी जा रही है। यह प्रदेश में पहले 500 आवेदकों दी जाएगी। इसके पीछे कारण ई-वाहनों और उनकी लम्बी दूरी के उपयोग को सुनिश्चित करना है।

सार्वजनिक परिवहन की स्थिति
- शहर में वर्तमान में ऑटो परमिट की संख्या - 7150

- हाल ही में स्वीकृत नए परमिट - 1500
- ई-वाहनों की अधिकृत पंजीकृत संख्या नहीं जोधपुर का एकमात्र ग्रीन रूट

शहर में वर्तमान घंटाघर-नई सडक़ से लेकर उदयमंदिर-पावटा तक का जो रूट है उसे हम ग्रीन मान सकते हैं। आजादी के पहले से ही इस रूट पर तांगा चला करते था। अभी कुछ समय यहां ई-रिक्शा भी चलने लगे हैं। अभी भी मिश्रित रूप से ई-रिक्शा और तांगा चलते हैं। दो पॉइंट के बीच अधिकृत रूप से ग्रीन चैनल ही है। हालांकि इस सडक़ पर अन्य वाहनों की एंट्री पूरी तरह से बंद नहीं है।

पत्रिका अपील :: परकोटे में हो ग्रीन-रूट
परकोटा शहर जहां सबसे ज्यादा जाम और प्रदूषण की समस्या होती है वहां सार्वजनिक परिवहन के साधन जैसे ऑटो रिक्शा के स्थान पर ई-रिक्शा को अपनाया जा सकता है। ई-रिक्शा की चौड़ाई अन्य ऑटो के मुकाबले कम है और इससे प्रदूषण भी नहीं फैलता। ऐसे में शहर में जाम व प्रदूषण की समस्या कुछ हद तक दूर हो सकती है। यदि यातायात नियंत्रण बोर्ड या प्रशासन इस पर सकारात्मक निर्णय ले तो आने वाले दिनों में पर्यटकों व शहरवासियों को सुगमता हो सकती है।



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