तापमान गिरा तो सजने लगा पक्षियों का सतरंगी संसार

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर. तापमान में गिरावट के साथ ही मारवाड़ में प्रवासी मेहमान पक्षी कुरजां सहित 40 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का आगमन हो चुका है। मौसम में ठंडक घुलते ही जोधपुर में पेलिकन के समूह पड़ाव डाल चुके है। शहर आस पास उम्मेद भवन की तलहटी स्थित जलाशय, शेखावत तालाब, गुड़ा विश्नोइयां, जाजीवाल कलां, सरदार समंद, मंडोर, बालसमंद, कायलाना माचिया पार्क व बड़ली तालाब व आस-पास का क्षेत्र रंग-बिरंगे पक्षियों के कलरव से गूंजने लगा है। जलाशयों पर वाटर बर्डस् के अलावा वॉबलर, टेलर बर्ड, लार्क, इंडियन रोलर नीलकंठ, बी-ईटर, पेलिकेन, शॉवलर, मूट, पिन्टेल, स्पॉट बिल, पर्पल मुरहेन सहित पश्चिम एशिया, तिब्बत, मंगोलिया, नेपाल, मध्यपूर्व एशिया से स्टेपी ईगल, पेरिजिन, बाज, बजार्ड, स्नेक हेड ईगल आदि शिकारी पक्षी भी शामिल है। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि अनुकूल जलवायु व सर्दी विलंब से शुरू होने के कारण प्रवासी परिन्दें इस बार ज्यादा समय तक जोधपुर व आसपास के जलाशयों पर ठहराव करने की उम्मीद है।

इस बार समय पूर्व ही कुरजां का आगमन

प्रेम और विरह के प्रसिद्ध लोकगीत के प्रतीक प्रवासी मेहमान पक्षी कुरजां ने मारवाड़ के विभिन्न जलाशयों पर करीब एक माह पहले ही दस्तक दे दी हैं। जिले के फलोदी क्षेत्र के खींचन गांव में कुरजां पक्षियों की नियमित देखरेख करने वाले सेवाराम माली के अनुसार पिछले कुछ सालों से निरंतर कुरजां की संख्या बढ़ रही हैं। इस वर्ष सितम्बर में ही कुरजां का आगमन समय से पूर्व हुआ है। जब उत्तरी रूस, उक्रेन, तथा कजाकिस्तान में बर्फ जमने लगती है तो सारस प्रजाति के सदस्य कुरजां (डेमासाइल क्रेन) हजारों मील का सफर तय कर जोधपुर के आस-पास एवं मारवाड़ विभिन्न क्षेत्रों में खेतों, पोखर, तालाब, नाडियो पर पहुंचते है।

थार में बन रहे है प्रवासी पक्षियों के नए ठिकाने

विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने पहली बार थार क्षेत्र में कुछ नए ठिकानों पर दस्तक दी हैं। कुरजां के समूह भी परम्परागत मार्ग पर कहीं भी भोजन की उपलब्धता के कारण नए ठिकाने व ठहराव स्थल बनाने लगे हैं। गुजरात काठियावाड क्षेत्र के जाम नगर, मेहसाना, वलसाड सहित देश के कई हिस्सों से कुरजां सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के प्रमुख ठहराव स्थल अब थार इलाकों में समृद्ध जैव विविधता, पानी की प्रचूरता और भोजन के कारण बनता जा रहा है। जोधपुर जिले का खींचन कुरजां का सर्वाधिक पसंदीदा स्थल हैं जहां करीब 25 से 30 हजार से अधिक कुरजां प्रतिवर्ष करीब छह माह के पड़ाव के लिए पहुंचती हैं। शर्मीले स्वभाव के पक्षियों की संख्या में सर्दी बढऩे के साथ उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती जाती है।

पेलिकन के 5 समूह पहुंचे जोधपुर में रफ, पेलिकन, कुरजां, बतखों की सात प्रजातियां, वल्चर्स सहित करीब 40 प्रजातियों के पक्षी जोधपुर पहुंच चुके है। तापमान में गिरावट के साथ शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की आवक और संख्या में बढ़ोतरी होगी। शरद पुरोहित, पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ जोधपुर



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3vXHhJT
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment