जोधपुर. शीतकालीन प्रवास पर आने वाले मेहमान परिंदों कुरजां की आश्रय स्थली पर आखिरकार इन्द्रदेव पूरी तरह मेहराबान हो गए है। करीब एक माह पूर्व पूरी तरह सूख चुके जोधपुर जिले के खींचन के तालाब बूंद बूंद पानी को तरस रहे थे। ऐसे में कुरजां की मुश्किलें बढऩे की संभावना भी प्रबल हो गई। हालांकि जिला प्रशासन ने पानी की पाइप लाइनें बिछाकर तालाबों को भरने की कवायद शुरू कर दी थी लेकिन मात्र पांच छह दिन बाद ही इन्द्रदेव की ऐसी मेहरबानी हुई कि क्षेत्र में जल संकट की समस्या का पूरी तरह निदान हो गया है। मारवाड़ में बरसात न्यून से भी कम होने के कारण पक्षी विशेषज्ञ इस बार शीतकालीन पक्षियों की संख्या में गिरावट दर्ज होने की संभावना जता रहे थे। कजाकिस्तान व मंगोलिया से उड़ान भर कर खीचन तक आने वाले साइबेरियन क्रेन कुरजां जलाशयों में प्रचूर मात्रा में पानी की आवक के बाद पहुंचने शुरू हो चुके है। खींचन के पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि खींचन के सभी प्रमुख तालाबों में पानी विजय सागर तालाब, निंबली नाडी, रातडी नाडी, तीजणियों का तालाब आदि में करीब दो साल तक के पानी की आवक होने से लोगों को राहत मिली है। पक्षी विशेषज्ञों को जोधपुर के आसपास के जलस्रोतों में वर्षा जल की आवक से शीतकालीन प्रवासी पक्षियों को तादाद बढऩे की उम्मीद है।
पक्षी चुग्गा घर में घास बनी परेशानी
खींचन में कुरजां के प्रमुख चुग्गा घर मैदान में अब तक घास नहीं हटाए जाने के कारण कुरजां पक्षियों की आवक कम हो रही है। पक्षियों के समूह अभी तक आसपास के खेतों में ही भोजन का इंतजाम कर रहे है। चुग्गा घर की सफाई का जिम्मा क्षेत्र की पंचायत समिति व ग्राम विकास अधिकारी के अधीन है।
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