एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज आज बन सकता है विश्वविद्यालय

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जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संकाय यानी एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के विवि बनने पर शुक्रवार को विधानसभा में मोहर लग सकती है। उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी शुक्रवार को विधानसभा में संशोधित विधेयक पेश करेंगे। उसके बाद ध्वनिमत से इसके पारित किए जाने की पूरी संभावना है। नए विवि का नाम एमबीएम विश्वविद्यालय जोधपुर होगा। यह एक बहु संकाय विवि होगा, जिसमें इंजीनियङ्क्षरग की विभिन्न शाखाएं होगी। इसका क्षेत्र संपूर्ण राजस्थान होगा। यह भी अन्य महाविद्यालयों को सम्बद्धता प्रदान कर सकेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2020-21 के अपने बजट भाषण में एमबीएम कॉलेज को विवि स्तर की सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए 20 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इसकी अनुपालना में विधेयक लाया गया है।
एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना 15 अगस्त 1951 को देश की सबसे पुरानी आइआइटी खडक़पुर के साथ की गई थी। वर्ष 1962 में यह जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से जुड़ा। भारत ही नहीं विश्व के कई देशों में इस कॉलेज के पढ़े हुए छात्र उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। भारत के वर्तमान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी एमबीएम के छात्र रहे हैं।

सिण्डीकेट की जगह बॉम, पहले साल मिलेंगे 10 करोड़
एमबीएम विवि में सर्वोच्च नियम निर्मात्री संस्था के रूप में सिण्डीकेट की जगह प्रबंध बोर्ड (बॉम) होगा। विवि के भवन निर्माण व आधारभूत सरंचना के लिए राज्य सरकार तात्कालिक तौर पर 10 करोड़ रुपए देगी। इसके बाद हर साल 3 करोड़ आवर्ती व्यय के लिए देने का प्रावधान किया गया है जिसे बढ़ाया भी जा सकता है। विवि में कुलपति के साथ प्रति कुलपति पद भी होगा। अन्य प्रावधान लगभग प्रदेश के अन्य विवि की तरह ही है।

जेएनवीयू का इंजीनियरिंय संकाय टूटेगा
एमबीए इंजीनियरिंग कॉलेज जेएनवीयू के कला, वाणज्यि, विज्ञान संकाय की तरह इंजीनियरिंग संकाय है। इसके हटने से जेएनवीयू को इंजीनियरिंग संकाय के लिए फिर से एआईसीटीई में आवेदन करना होगा।

कंगाल हो जाएगा जेएनवीयू, 35 करोड़ सालाना आय कम होगी
जेएनवीयू की सालाना आय करीब 110 करोड़ रुपए है। इसमें से 35 करोड़ रुपए की आय एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से होती है। विवि में करीब 1450 पेंशनर्स है जिनकी सालाना पेंशन सातवें वेतन आयोग के बाद करीब 80 करोड रुपए हो गई है। राज्य सरकार प्रदेश के किसी भी विवि को पेंशन का पैसा नहीं देती है। यह विवि की आय पर भारित होता है। एमबीएम के विवि बनने से जेएनवीयू की माली हालत खराब हो जाएगी और वह पेंशनर्स को पेंशन भी नहीं दे पाएगा।



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