जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने सूक्ष्म जीवाणुओं का प्रयोग करके ईंधन सेल तैयार किया है। यह सीवरेज अथवा खराब पानी से बिजली उत्पादन कर सकेगा। यह तकनीक शैवाल जनित ईंधन सेल की तुलना में काफी बेहतर और सस्ती है। इससे सीवरेज के बड़े ट्रीटमेंट प्लांट से बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत आइआइटी जोधपुर के बायोसाइंस व बायोइंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मीनू छाबड़ा ने माइक्रोबायल फ्यूल सेल तैयार किया है। इस डिवाइस में मौजूद सूक्ष्मजीव सीवरेज के पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ को सीधे बिजली में परिवर्तित कर देते हैं। सीवरेज के पानी में मौजूद कार्बनिक पदार्थ सूक्ष्म जीवाणु के संपर्क में आने के बाद इलेक्ट्रॉन रिलीज करते हैं। इलेक्ट्रॉन के मूवमेंट से बिजली पैदा होती है।
हर जगह मुफीद
वर्तमान में शैवाल जनित ईंधन सेल का उपयोग सीवरेज पानी से बिजली उत्पादन में किया जा रहा था। आइआइटी जोधपुर ने अपनी तकनीक और शैवाल जनित तकनीक का विश्लेषण भी किया। इसके अनुसार संवेदनशील इलाकों में शैवाल कई बार मुश्किल से काम करता है, जबकि जीवाणु जनित सेल हर जगह बेहतर व उच्च कार्यक्षमता के साथ विद्यतु पैदा करता है।
गांव-ढाणियों को फायदा
आइआइटी जोधपुर की इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा गांव और ढाणियों को होगा, जहां वर्तमान में समुचित रूप से बिजली की व्यवस्था नहीं है। दूरस्थ इलाकों में अक्सर बिजली कटौती रहती है। ऐसे में गांव अपने स्तर पर इस तकनीक के जरिए रात को गली-मोहल्ले में एलईडी लाइटों के जरिए सार्वजनिक रोशनी की व्यवस्था कर सकेगा।
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