एमबीएम कॉलेज में बीसीटी कोर्स के साथ ‘सौतेले’ जैसा व्यवहार

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जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में 9 साल पहले शुरू हुए बीसीटी (बिल्डिंग, कंस्ट्रक्शन एण्ड टेक्नोलॉजी) पाठ्यक्रम के साथ ‘सौतेला’ जैसा व्यवहार किया जा रहा है। बीसीटी का न तो कोई विभाग है और न ही शिक्षक। इसलिए गत नौ साल में इसे तीन विभागों ने आपस में अदला-बदली करके अपने पास रखा। एक बार बीच में पूरी तरीके से बंद हो गया। पिछले साल पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग खोलने के लिए अंतिम रूप से इसकी बलि चढ़ा दी गई। विधानसभा में शहर विधायक मनीषा पंवार की ओर से यह प्रश्न उठाने के बाद विवि प्रशासन ने अब इसका विभाग खोलने का निर्णय किया है। इसके लिए एआईसीटीई को पत्र लिखा जाएगा।

आर्किटेक्चर में जीरो सेशन हुआ तो बीसीटी खोला
एआईसीटीई ने वर्ष 2012 में एमबीएम कॉलेज के आर्किटेक्चर विभाग में जीरो सेशन घोषित कर दिया। कॉलेज ने इस विभाग के अंतर्गत स्ववित्त पोषित आधार पर 60 सीट के लिए बीसीटी पाठ्यक्रम शुरू कर दिया। इस दरम्यान आर्किटेचर को सेशन की अनुमति मिल गई और उसने बीसीटी चलाने के लिए हाथ खड़े कर दिए। आर्किटेक्चर से निकाले जाने के बीसीटी के लिए स्ट्रक्चरल विभाग के द्वार खोल गए। कुछ समय तक वहां रखने के बाद इसे 2015 में सिविल विभाग में दिया गया। गया। सिविल विभाग ने कुछ दिनों बाद ही हाथ खड़े कर दिए जब कोई भी विभाग इसे लेने के लिए आगे नहीं आया तो वर्ष 2016-17 में एडमिशन बंद कर दिया गया। उस साल छात्रों को प्रवेश नहीं मिला।

फिर सिविल ने लिया, पेट्रोलियम आते ही फिर बंद
वर्ष 2017-18 में सिविल विभाग के अंतर्गत बीसीटी को फिर शुरू किया गया। वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री के एमबीएम कॉलेज में पेट्रोलियम विभाग खोलने की घोषणा के बाद एआईसीईटी ने शिक्षकों की कमी को देखते हुए किसी एक विभाग को बंद करने के लिए कहा। कॉलेज ने निगाहें फिर ‘सौतेले’ पर गई और वर्ष 2020 में इसे बंद कर दिया गया। अब दो साल से यह कोर्स बंद है।

कर्मचारी चयन आयोग ने नकारा, आइआइटी भी नकारती है
एमबीएम बीसीटी की डिग्री ‘इक्विलेंट टू सिविल’ करके देती है। देश में बहुत कम जगह यह कोर्स संचालित है। कर्मचारी चयन आयोग ने जेईएन भर्ती परीक्षा में इसकी डिग्री मानने से इनकार कर दिया। देश में कई आइआइटी भी एमटैक पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं देती है। विवि फिर भी बीसीटी को न छोड़ पा रहा है और न ही अपना पा रहा है।
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‘विधानसभा में प्रश्न उठने के बाद सिण्डीकेट ने बीसीटी का अलग विभाग शुरू करने की सैद्धांतिक सहमति दी है। एआईसीटीई को इस संबंध में लिखा जाएगा।’
प्रो सुनील शर्मा, डीन, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज



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