जोधपुर।
कोरोना के साथ कंटेनरों की कमी व शिपिंग चार्ज में वृद्धि के कारण भारत के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग पर विपरीत असर पड़ा है। इससे इस बार क्रिसमस फेस्टिवल पर विदेशों में जोधपुर का विश्वविख्यात हैण्डीक्राफ्ट नहीं चमक पाएगा। हाल यह है कि निर्यातकों का तैयार माल भी विदेशों में बिकने के लिए नहीं जा पा रहा है। कंटेनरों की कमी के चलते शिपिंग कंपनियां भी भाड़ा बढ़ाती जा रही हैं। पिछले 6 माह की अवधि में शिपिंग किराया करीब 4 गुना तक बढ गया है । जोधपुर से प्रतिवर्ष 3 हजार करोड़ का निर्यात होता है। सबसे अधिक कारोबार क्रिसमस पर होता है। जोधपुर से निर्यात होने वाले कुल उत्पादों में करीब 60 फ ीसदी उत्पाद क्रिसमस सीजन में निर्यात होता है। जोधपुर में बनने वाले हस्तशिल्प उत्पाद गिफ्ट आयटम्स, डेकोरेटिव आयटम्स, फ र्नीचर होते हैं। पश्चिमी देशों में अधिकांश लोग क्रिसमस से पहले फर्नीचर व पुराने सजावटी आइटम हटाकर नए सिरे से घर की साज-सज्जा करते है।
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अगस्त से सितम्बर निर्यात के लिए महत्वपूर्ण
अगस्त से मध्य सितंबर तक निर्यातकों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण समय है। क्रिसमस के ऑर्डर इसी समय में रवाना करने होते हैं। अमरीका सहित सभी पश्चिमी देशों के शोरूम में माल अक्टूबर तक सजने लगता है। अगर ऑर्डर समय से नहीं पहुंचते हैं तो निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ भरत दिनेश के अनुसार कंटेनर की कमी व शिपिंग चार्ज में वृद्धि से जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग प्रभावित हो रहा है। सरकार से बार-बार इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे है, ताकि निर्यात उद्योग निर्बाध रूप से चल सके।
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विदेशी ग्राहक पुर्वी यूरोप व मेक्सिको का कर रहे रुख विदेशी ग्राहक
आगामी क्रिसमस सीजन की देखते हुए भारत से समय पर कंटेनर नहीं आने की स्थिति में यहां के निर्यातकों के कंटेनर होल्ड पर रखवा रहे है। भारत से भेजे गए कई हैण्डीक्राफ्ट के कंटेनर शिपमेन्ट विदेशी पोर्ट पर अटके पडे है । वहीं, विदेशी ग्राहक पूवी यूरोप व मेक्सिकन देशों की ओर रुख कर रहे है, जो भारत व जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग के लिए चिन्तनीय है। वरिष्ठ हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक राधेश्याम रंगा ने बताया कि अमरीका, यूरोप आदि देशों में समय पर कंटेनर नहीं पहुंचेंगे तो ऑर्डर कैन्सिल होने का खतरा रहेगा। वहीं यहां के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग भी प्रभावित होगा। सरकार को विदेशी मुद्रा अर्जन में भूमिका निभाने वाले उद्योग की समस्या के समाधान पर विचार करना चाहिए।
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