हर्षोल्लास से मनाई देवझूलनी एकादशी

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जोधपुर. देवझूलनी एकादशी शुक्रवार को हर्षोल्लास से मनाई गई। सूर्यनगरी के सभी प्रमुख वैष्णव मंदिरों में पुजारियों की ओर से धार्मिक अनुष्ठान हुए। कृष्ण मंदिरों में सूर्यास्त से पूर्व भगवान कृष्ण के चल विग्रह को कोविड गाइड लाइन पालना के साथ पवित्र सरोवरों में अभिषेक करने के लिए लाया गया। रेवाडिय़ों के समक्ष हरि नाम संकीर्तन करते वैष्णव भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। घरों में नित्य ठाकुरजी की सेवा करने वाले भक्त भी नजदीकी जलाशयों में पहुंचे और विग्रह का जलाभिषेक किया। मंडोर क्षेत्र के रामतलाई जलाशय और पूंजला नाडी पर आस-पास के क्षेत्र के श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग की पालना और जयघोष करते ठाकुरजी की रेवाडिय़ों के साथ पहुंचे और देव विग्रहों का अभिषेक किया। जय कन्हैया लाल की.. हाथी घोड़ा पालकी...के जयकारों के साथ रामतलाई जलाशय पर ठाकुरजी विग्रहों का वर्षा जल से अभिषेक कर पूजा अर्चना की गई। रामतलाई पर्यावरण संरक्षण संस्था के संयोजक बलवीर भाटी इस बार बारिश कम होने से जलाशय में पानी की आवक कम होने और कोविड गाइडलाइन के कारण सीमित संख्या में ही भक्तजन पहुंचे। राईका बाग स्थित युगलजोड़ी बाबा रामदेव मंदिर में इस बार कोविड गाइडलाइन के कारण शोभायात्रा स्थगित कर ठाकुरजी के विग्रह का जलाभिषेक मंदिर प्रांगण में ही किया गया। ठाकुरजी विग्रह के गंगाजल से अभिषेक करने के बाद सैनाचार्य अचलानंदगिरि ने महाआरती कर मारवाड़ में खुशहाली व सर्वमंगल कामना की।

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पालकी में भी पहुंचे ठाकुरजी
पूंजला नाडी परिसर में ग्राम पूंजला व आनासागर के ठाकुरजी को पालकी में विराजित कर अभिषेक के लिए लाया गया। सैनिक क्षत्रिय पूंजला नाडी संरक्षण एवं पर्यावरण विकास संस्थान के संस्थान संयोजक राकेश सांखला व कार्यक्रम संचालक जगदीश देवड़ा ने बताया कि कोविड 19 के दिशा-निर्देशों के चलते सादगी पूर्ण आयोजन किया गया। समस्त पीपा क्षत्रिय समाज विजय चौक की ओर से ठाकुरजी के रेवाड़ी विजय

बहनों को भाई को हथेली में पिलाया जल

कोरोना महामारी के कारण अधिक मास के दूसरे साल भी हुए आयोजन

जोधपुर. देवझूलनी एकादशी को जोधपुर के विभिन्न जलाशयों पर पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़ा अनूठा लोकपर्व समंद झकोळना 'तेरूंडीÓ हर्षोल्लास से मनाया गया। विवाहित बहनें अपने भाई को जलाशय में बारिश के पवित्र जल को पिलाया और जलदेवता की साक्षी में उसकी दीर्घायु, स्वास्थ्य व सुख समृद्धि की कामना की। समंद झकोलना का आयोजन पुरुषोत्तम वर्ष (अधिक मास ) के दौरान होता है लेकिन कोरोना महामारी के कारण अधिक मास के दूसरे वर्ष देवझूलनी एकादशी को इस परम्परा का निर्वहन किया गया।



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