जोधपुर।
शहर के ऐसे हस्तशिल्पी, जो स्वयं दसवीं पास पास है, लेकिन उच्च शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों को ट्रेडिशनल आर्ट सिखा रहे है। यह है मोहनलाल गुजर, जो कई शिक्षण संस्थाओं के स्टूडेन्ट्स को पढ़ा रहे है। पारंपरिक मोजड़ी के राष्ट्रीय स्तर के हस्तशिल्पी मोहनलाल स्टूडेन्ट्स को आकर्षक मोजड़ी व लेदर की विभिन्न वस्तुएं बनाने की कला सिखा रहे है । मोहनलाल अपने हुनर के दम पर वर्ष 2016 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके है।
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स्टूडेन्ट्स को सिखा रहे ट्रेडिशनल आर्ट
मोहन वर्तमान में नेशनल डिजाइन सेंटर की ओर से चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहे है। जिसका उद्घाटन कार्यालय विकास आयुक्त हस्तशिल्प कार्यालय की ओर से किया गया। वहीं, निफ्ट जोधपुर के स्टूडेन्ट्स को भी ऑनलाइन (कोरोना के कारण) जूती निर्माण की बारीकियां सिखा रहे है। भारत सरकार की हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय की गुरु-शिष्य योजनान्तर्गत भी कई विद्यार्थियों को कशीदाकारी व जूती निर्माण प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी है। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फोर हैण्डीक्राफ्ट्स की विभिन्न योजनाओं में कई विद्याथी तैयार किए है।
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विरासत में मिली कला
मोहनलाल ने पारंपरिक जूती निर्माण करने वाले परिवार में अपनी मां से चर्म शिल्प पारंपरिक जूती बनाना और कशीदाकारी का काम सिखा। मोहन ने बताया कि साधारण जूती-मोजड़ी की एक जोड़ी एक दिन में तैयार कर लेते है, जबकि विशेष कारीगरीयुक्त जोड़ी बनाने में 2 से 3 माह का समय लग जाता है। मोहनलाल एक्सपेरिमेंटल वर्क को तवज्जो देने के साथ 300 वर्ष पुरानी हाथ से सिलाई करने वाली परंपरा को भी जीवित रख रहे है।
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