NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. भोलेनाथ को समर्पित श्रावण मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शुक्रवार को शिवरात्रि पर्व सर्वार्थसिद्धि योग में मनाया जाएगा। इस दिन शिव पूजा का विशेष फल मिलता है। शिव पूजा के लिए पूरा दिन शुभ रहेगा लेकिन शिवरात्रि होने के कारण सूर्यास्त के बाद 4 प्रहर में पूजन करने की परंपरा है। यानी पूरी रात हर 3 घंटे में शिव अभिषेक व पूजा की जाएगी। श्रावण की शिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि शुभ योग सूर्योदय से शुरू होगा और पूरे दिन-रात रहेगा। इस शुभ योग में की गई पूजा और भी फलदायी होगी। साथ ही दिनभर खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। ज्योतिषियों के अनुसार हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि होती है। लेकिन फाल्गुन और श्रावण महीने की शिवरात्रि पर पूरी रात शिवलिंग का अभिषेक और विशेष पूजन होता है।
श्रावण शिवरात्रि कब से कब तक
श्रावण शिवरात्रि को त्रयोदशी तिथि शुक्रवार शाम करीब 6.40 बजे से शुरू होकर शनिवार शाम 7.13 बजे तक रहेगी। शुक्रवार को प्रदोष काल (सूर्यास्त) और निशिथ काल (मध्यरात्रि ) में चतुर्दशी तिथि होने से शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। स्कंदपुराण और शिवपुराण में श्रावण के महीने की शिवरात्रि पर शिव पूजा का विशेष महत्व बताया है। इन ग्रंथों के मुताबिक रात के 4 प्रहरों में शिवजी की पूजा करनी चाहिए। ज्योतिष अनीष व्यास के अनुसार शिवपुराण के मुताबिक ये दिन भोलेनाथ की पूजा के लिए बहुत खास माने गए हैं। इन तिथियों पर की गई शिव पूजा से कई गुना शुभ फल मिलता है। इनमें जल और दूध से शिवलिंग की पूजा-अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण और स्वास्थ्य लाभ होता है। दूध, जल, मदार, धतूरा, ऋतुपुष्प फल और बिल्वपत्र चढ़ाकर भी पूजन किया जा सकता है।
शिवरात्रि को चारों प्रहर की पूजा के मुहूर्त
पहले प्रहर की पूजा का समय - शाम 7.10 से रात 9.50 तक (प्रदोष काल)
रात के दूसरे प्रहर की पूजा का समय - रात 9.50 से 12.30 तक (अगस्त 07)
तीसरे प्रहर में पूजा का मुहूर्त - 12.30 से 3.08 बजे तक
चौथे और आखिरी प्रहर में शिव पूजा का समय -3.08 से सुबह 5.50 तक
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