ऩवग्रहों की अनुकूलता के लिए आज करें पौधरोपण

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NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. श्रावणी अमावस्या रविवार को सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी। रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने से रवि पुष्य योग कहलाएगा। इस योग में पूजन तथा दान पुण्य का विशेष फल प्राप्त होता है। अमावस्या के दिन पितरों को खुश करने के लिए पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। प्रकृति को पुन: कुछ लौटाने के पर्व पर पौधरोपण करने का महत्व है। मंदिर परिसर व तीर्थ स्थलों में पीपल, बरगद, केला, नींबू अथवा तुलसी का पौधरोपण करना शुभ माना गया है। प्रकृति के प्रति आभार जताने के विशेष दिन श्रावणी अमावस्या को जोधपुर में भोगिशैल पहाडिय़ों के धार्मिक स्थलों के दर्शन की परम्परा रही है। शास्त्रीय मान्यता से देखें तो पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है। शनि वर्तमान में मकर राशि में अपनी ही राशि में परिभ्रमण कर रहे हैं।

किस पौधे का हमारे जीवन पर क्या हो सकता है असर

शमी: यह पौधा विजय की प्राप्ति के साथ-साथ कार्य की सिद्धि एवं शनि की साढ़ेसाती या ढैया में भी लाभकारी है ।
श्वेतार्क : रोपने से मांगलिक कार्य में प्रगति, विवाह आदि के योग संतान प्राप्ति व बंधन की बाधा का निराकरण होता है।

अशोक : इस पौधे को रोपने से अज्ञात दोष का निवारण होता है, साथ ही वंश वृद्धि में सहायता होती है।
पीपल : देव स्थान पर विशेषत: भगवान विष्णु और कृष्ण के मंदिर परिसर में रोपने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

नीम : इस पौधे को रोपने से शारीरिक कष्ट एवं चर्म रोग के दोष का निराकरण होता है ।
तुलसी : हरि तुलसी हो या श्याम तुलसी इनको रोपने से घर परिवार में सुख शांति होती है।

बरगद : इस पौधे को रोपने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आंवले : पौधे को रोपने से लक्ष्मी कृपा व सौभाग्य की वृद्धि होती है ।

जामुन: यह पौधे को रोपने से वायव्य दोष की निवृत्ति व बौद्धिक सक्रियता रहती है ।
आम: पौधे को रोपने से संपत्ति में वृद्धि होती है ।

वनस्पति का कारक है चन्द्रमा

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को वनस्पति का कारक ग्रह बताया गया है जो कि चंद्रमा की ही अमृत रोशनी से वनस्पति पुष्ट होती है। संयोग से हरियाली अमावस्या के दिन चंद्रमा अपनी राशि कर्क में रहेंगे, जिसके कारण केंद्र योग बना रहे हैं। यही नहीं शनि भी मकर राशि में चंद्रमा के साथ प्रतियोगी स्थिति में रहेंगे। ऐसी स्थिति में चंद्र व शनि का केंद्र योग रहेगा। यह योग वनस्पति तंत्र में विशेष मान्यता रखता है , क्योंकि ऐसे लोगों में जन्म कुंडली के अंतर्गत उत्पन्न चंद्र शनि की युति का दोष समाप्त करने के लिए इस दिन वनस्पति तंत्र के माध्यम से पौधरोपण करना चाहिए।

नवग्रहों की समिधा में
आंकड़ा-सूर्य

पलाश- चंद्रमा
खेर-- मंगल

अपामार्ग-बुध
पीपल--बृहस्पति

गूलर-शुक्र
शमी -शनि (खेजड़ी )

दुर्वा: राहु
दर्भ : पवित्री केतु



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