जोधपुर. कोई कायकर्ताओं को साथ लिए आलाकमान नेताओं के नाम लेकर जिंदाबाद... जिंदाबाद.़.. करते पहुंचा तो किसी ने बाहर खड़े होकर आते-जाते लोगों को हाथ-जोड़ा। पंचायतीराज चुनाव मैदान में उतरने की ख्वाहिश लिए ग्रामीण क्षेत्रों के कई कांगे्रस नेता डाली बाई मंदिर चौराहा के पास एक निजी रिसोर्ट में पहुंचे। यहां आयोजित देहात कांग्रेस की बैठक का समय दोपहर ११ बजे था, लेकिन कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा लगते दोपहर सवा एक बज गई। इससे पहले दोपहर साढ़े बारह बजे तक मीटिंग हॉल में सारी कुर्सियां कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं से खचाखच भर गई। ग्रामीण क्षेत्र से आए नेताओं ने जमकर अपने शक्ति प्रदर्शन का मुझायरा पेश किया। मीटिंग में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के समक्ष ३ सौ से ज्यादा आवेदन आए।
आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत ने कहा कि गांवों की सरकार बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रदेश में सभी के आशीर्वाद से कांग्रेस की सरकार है। अब उन्हें उम्मीद हैं कि पूरे राजस्थान के अंदर फिर से कांग्रेस पार्टी का डंका बजेगा। पार्टी जो भी निर्णय लें, जिसे भी अधिकृत प्रत्याशी बनाए, सभी कार्यकर्ता पार्टी के उस अधिकृत प्रत्याशी को जिताने में लग जाए। प्रभारी मंत्री महेन्द्र चौधरी ने भाजपा का चुनाव में सूपड़ा साफ करने का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा के तीन काले बिल को भूलना नहीं चाहिए। पंचायत चुनाव में योग्य कार्यकर्ताओं को अवसर अवश्य मिलेगा। ढाई साल में कराए गए विकास कार्यों के आधार पर वोट मांगें, जीत हमारी होगी। सहप्रभारी व विधायक प्रशांत बैरवा ने कहा कि यहां कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है। प्रत्याशी एेसा होगा, जो
जीताऊ हो, बिकाऊ नहीं हो। संगठन प्रभारी व विधायक रामलाल जाट ने भी कार्यकर्ताओं में जीत को लेकर जोश भरा।
कार्यक्रम में निवर्तमान जिलाध्यक्ष हीराराम मेघवाल, राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता
बेनिवाल, लोहावट विधायक किसनाराम विश्नोई, लूनी विधायक महेन्द्रसिंह विश्नोई, पाली के पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़, पीसीसी सचिव श्रवण पटेल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में नेमाराम बेरा, छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सुनील चौधरी, यूथ कांग्रेस के देहात अध्यक्ष रामनिवास बुधनगर सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद थे।
सोशल डिस्टेंस नजर नहीं आई
देहात कांग्रेस ने कोविडकाल के मद्देनजर एक निजी रिसोर्ट के हॉल में बैठक का आयोजन किया। लेकिन कांग्रेस नेता बड़ी संख्या में पहुंच गए। इस कारण सोशल डिस्टेंस बरकरार नहीं रह पाई। कइयों को सीट तक नहीं मिली। उन्हें बाहर खड़ा रहना पड़ा। कई लोग तो यहां बगैर मास्क नजर आए।
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