NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. भगवान कृष्ण के बड़े भ्राता भगवान बलराम का जन्म दिवस २8 अगस्त को ऊब छठ (चंदनषष्ठी पर्व) के रूप में परम्परागत हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। सुहागिनें घर-परिवार की सुख समृद्धि के लिए सूर्यास्त बाद चंदनयुक्त जल सेवन कर कठिन व्रत का संकल्प लेगी। इसके बाद निरंतर चन्द्रोदय तक तक खड़े रहकर उपासना एवं पौराणिक कथाओं का श्रवण करेगी तथा उदित चन्द्रमा को अग्र्य देकर कठिन व्रत का पारणा करेगी। सूर्यनगरी के मंदिरों में व्रती महिलाओं के लिए संकीर्तन, कथा श्रवण व संगीतमय भक्तिसंध्या का आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई है।
इस बार रवि योग में मनेगी छठ
ज्योतिष अनीष व्यास ने बताया कि शनिवार 28 अगस्त को ऊब छठ रवि योग में मनाई जाएगी। ऊब छठ का व्रत और पूजा विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु के लिए तथा कुंआरी लड़कियां अच्छे पति कामना के लिए करती है। सूर्यास्त के बाद से लेकर चन्द्रमा के उदय होने तक खड़े रहकर उपासना के कारण ही इसको ऊब छठ व्रत कहा जाता है। व्रती महिलाएं चन्दन घिसकर टीका लगाती है और जल मिश्रित चंदन का सेवन भी करती है। व्रत संकल्प के बाद लक्ष्मी,गणेश, इष्टदेव, ठाकुरजी को कुमकुम और चन्दन से तिलक कर अक्षत अर्पित करती है। क्षेत्र व घर परिवार की बुजुर्ग महिलाओं से ऊब छट व्रत की पौराणिक कथा श्रवण करती है। ऊब छठ के कठिन व्रत का नियम है कि जब तक चांद नहीं दिखेगा तब तक महिलाओं को खड़े ही रहना पड़ता है। व्रती महिलाएं मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन पूजन कर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और भजन संकीर्तन तथा पौराणिक कथाओं का श्रवण करती हैं।
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