जोधपुर. कायलाना-तख्तसागर को राजीव गांधी लिफ्ट केनाल भर रही है और हर 15 दिन में शटडाउन लेना पड़ रहा है। उम्मेद सागर में एक बूंद पानी नहीं आया। बड़ली तालाब जहां पक्षी व जलीय जीव को जीवित रखने के लिए भामाशाहों ने पहल की, उसके बाद बारिश का पानी नगण्य है। यह कुछ प्रमुख जलाशयों के हालात है। आकड़ों में मानसून सीजन की बारिश महज 25 प्रतिशत कम है, लेकिन ये जलाशय तो बारिश के पानी के लिहाज से 100 फीसदी खाली है।
कायलाना-तख्तसागर
शहर का सबसे प्रमुख जलाशय। इसका केचमेंट पूरी तरह से माइंस की भेंट चढ़ चुका है, लेकिन फिर भी यहां बारिश के पानी की हर बार कुछ आवक होती है। इस बार यह नगण्य है। वर्तमान में 220 एमएसीएफटी पानी है, वह भी हर 15 दिन में एक बार शटडाउन लेकर बचाया जा रहा है। अगले साल फिर से दो माह का इंदिरा गांधी नहर का क्लोजर है, इसलिए इसमें पानी का लेवल 350 एमसीएफटी तक ले जाना है। बारिश होती तो 20 से 40 एमसीएफटी का फायदा मिलता।
उम्मेद सागर
इस मानसून सीजन में एक बूंद पानी नहीं आया। इसका कैचमेंट पूरी तरह से अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। दो साल पहले पानी की अच्छी आवक हुई थी, तब कुछ समय के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई भी की गई। लेकिन लगातार कैचमेंट में बढ़ रही आवासीय कॉलोनियों ने रास्ता रोक दिया। दूसरा बारिश भी तेज गति नहीं दिखा पाई। यहां वाटर लेवल शून्य है।
बड़ली तालाब
इसका कैचमेंट भी पूरी तरह से खदानों की भेंट चढ़ गया है। सर्दियों में विदेशी पक्षियों और बड़ी संख्या में जलीय जीवों का निवास है। गर्मियों की शुरुआत में पानी सूखता देख एक संस्थान उड़ान फाउंडेशन के अध्यक्ष वरूण धनाडिया ने सोशल मीडिया पर अपील जारी की और कई भामाशाहों ने 300 से ज्यादा टैंकर पानी डलवा दिया। इसी का परिणाम है कि आज तक कुछ पानी मौजूद है, लेकिन बारिश के पानी की आवक यहां भी नगण्य है। इस तालाब को केनाल के रिजर्व वायर के रूप में उपयोग करने की मांग भी लोगों ने की है।
फैक्ट फाइल
- 360 एमएम औसत पूरे वर्ष में
- 125 एमएम मानसूनी बारिश अब तक (1 जून से 10 अगस्त तक )
- 167 एमएम बारिश होनी चाहिए थी अब तक मानसून में
- 220 एमसीएफटी पानी कायलाना-तख्तसागर में
- 0 फीट पानी उम्मेद सागर में अभी
ये कुछ बड़े कारण
- एक तो बारिश छितराई सी इसलिए संग्रहण योग पानी नहीं आया।
- जलाशयों में पानी की आवक के लिए तेज गति की बारिश की आवश्यकता रहती है।
- कैचमेंट काफी हद अतिक्रमण व खनन की चपेट में है
इनका कहना है...
इस बार बारिश उस स्तर की नहीं हुई, इसलिए पानी की आवक नहीं हुई है। बड़ी उम्मीद हमें कायलाना-तख्तसागर से रहती है। लेकिन यहां भी पानी की आवक नहीं हुई है। उम्मेद सागर कभी-कभार भरता है, इस बार पूरा खाली है।
- नीरज माथुर, मुख्य अभियंता, पीएचइडी जोधपुर।
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