NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. शहर के चारों तरफ वनभूमि के आसपास अंधाधुंध खनन, गोचर, ओरण पर भूमि पर लगातार अतिक्रमण के कारण नीलगाय के परम्परागत आश्रय स्थल खत्म होने से वे अब शहर के विभिन्न क्षेत्रों के रिहायशी क्षेत्रों व सड़कों की ओर रूख करने लगे है। पानी और भोजन की तलाश में रोजड़े शहर के मंडोर एयरफोर्स, रसाला रोड, सरदार क्लब पोलो, मधुबन, बनाड़, नागौर रोड, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, जेएनवीयू न्यू कैम्पस, आफरी के आसपास रिहायशी क्षेत्रों में विचरण करते सहज नजर आने लगे है। कायलाना जलाशय व किला रोड जैसे पर्यटन स्थलों के आसपास भी भारी भरकम रोजड़े घूमते नजर आते है।
एंटीलोप प्रजाति का विशाल
वन्यजीव सड़कों पर विचरण करते समय रोजड़ों के तेज दौडऩे से वाहन दुर्घटना अथवा बड़ी जन हानि भी हो सकती है। हर साल शिकार, वाहन दुर्घटनाओं, सूखे कुएं में गिर जाने तथा खेतों की तारबंदी में फंस कर करीब 500 से अधिक रोजड़े गंवा देते है। समूचे एशिया में आकार में सबसे बड़े एंटीलोप प्रजाति के वन्यजीव नील गाय (बोसेपेफस ट्रेगोकेमेलस ) जोधपुर शहर के आसपास व जिले के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 20 से 25 हजार है। वन्यजीव प्रेमी गौशाला की तर्ज पर राज्य सरकार की ओर से ओरण व गोचर भूमि में रोजड़ों के लिए हर पंचायत क्षेत्र में विशाल शेल्टर हाउस बनाकर उनके लिए चारे की व्यवस्था करने की मांग करते रहे है।
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