जोधपुर. अपर सेशन न्यायालय संख्या एक के पीठासीन अधिकारी सत्यपाल वर्मा ने पावटा क्षेत्र की जालम विलास स्थित जमीन के फर्जी वसीयत बनाकर बेचान करने के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया,आरोपी जालम निवास के मालिक रहे हरीसिंह का पड़पौत्र है। प्रकरण के अनुसार जालम विलास संपत्ति के मालिक रहे हरिसिंह के पड़पौत्र कमलसिंह पुत्र जब्बरसिंह ने स्वयं की बनी वसीयत के आधार पर मोहित माहेश्वरी नामक व्यक्ति के पक्ष में बेचान कर दी, इसमें हरीसिंह के ही अन्य वारिसों ने साख भी दी। आरोपी के काका और हरीसिंह के पौत्र भंवरसिंह को इसकी जानकारी मिलने पर कमलसिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। महामंदिर पुलिस ने बेशकीमती जमीन के धोखाधड़ी के आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी की ओर से जिला न्यायालय में जमानत याचिका पेश कर कहा कि वसीयत के संबंध में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट नहीं है, इस मामले में पूर्व में भी एक मुकदमा दर्ज है जिसमें हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। अपर लोक अभियोजक नटवर शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि वसीयतनामा वर्ष 1982 में तैयार करवाना दर्शाया गया है जबकि 1982 में कमलसिंह का जन्म ही नहीं हुआ ,एक अन्य मामले में आरोपी ने स्वयं ही वसीयत को फर्जी होना स्वीकार किया था।कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत खारिज कर दी।
महाराजा ने जालम विलास की सम्पति कामदार को की थी दान
पावटा क्षेत्र में स्थित बेशकीमती जालम निवास संपत्ति महाराजा जालमसिंह के पुत्र महाराजा गुमानसिंह ने बनवाई थी।महाराजा गुमानसिंह के पास हरिसिंह कामदार की हैसियत से काम करते थे। महाराजा गुमानसिंह ने हरिसिंह की निष्ठापूर्ण काम को देखते हुए जालमविलास संपत्ति में से जायदाद का एक हिस्सा हरिसिंह को दान कर दिया था, तब से यह जायदाद हरिसिंह के वंशजों के पास रही है।इस समय हरिसिंह के पौत्र, पड़पौत्र तथा अन्य अलग-अलग हिस्सों में निवास कर रहे हैं। हरिसिंह के वंशजों के बीच संपत्ति को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है।
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