जोधपुर. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने सिस्टम का प्रभाव कम होने पर दो दिन पहले भारतीय मौसम विभाग ने मानसूनी ट्रफ (कम दबाव का क्षेत्र) के हिमालय की तलहटी पर जाने का पूर्वानुमान व्यक्त किया था। यह एक तरह से मानसून का ब्रेक होता है जो एक सप्ताह से दस दिनों तक चल सकता है। इससे अगले सप्ताह बारिश की संभावनाएं बिल्कुल नहीं थी लेकिन सोमवार को बंगाल की खाड़ी में बने वेल मार्क लॉ प्रेशर एरिया के मंगलवार को लॉ पे्रशर एरिया में बदलते ही मौसम वैज्ञानिकों की आंखों में चमक आ गई। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान बदल गया। अब मानसूनी ट्रफ लाइन हिमालय की तरफ बढ़ेगी जरुर, लेकिन उसे दिल्ली के आसपास से ही वापस खींचकर नीचे राजस्थान पर ले आया जाएगा। अभी दो-तीन दिनों तक बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी लेकिन 30-31 जुलाई को पूर्वी राजस्थान में फिर से मानसूनी बादल उमड़-घुमड़ कर आएंगे।
श्रीगंगानगर से लेकर कोलकाता तक जाता है नॉर्मल ट्रफ
मानसूनी ट्रफ एक सीधी लाइन होती है जो बंगाल की खाड़ी से लेकर उत्तर दिशा तक आती है। यह एक तरह से कम दबाव का क्षेत्र होता है। इसके इर्द-गिर्द ही बारिश होती है। मानसून का सामान्य ट्रफ पश्चिमी में श्रीगंगानगर से शुरू होकर लखनऊ के पास से गुजरते हुए झारखड़ के अंदर से कोलकाता तक जाता है। कोलकाता के पास बंगाल की खाड़ी का हैड है, जहां से नमी की लगातार आपूर्ति होती है। यही नमी इस ट्रफ के सहारे राजस्थान तक पहुंचती है। सामान्यत मानसून के दिनों में यह ट्रफ दो-तीन बाद उत्तर की तरफ यानी हिमालय की तलहटी में शिफ्ट हो जाता है जिससे पहाड़ों पर ही बारिश होती है। उत्तरी-पश्चिमी व मध्य भारत सूखा रह जाता है।
मध्यप्रदेश तक खत्म हो रहा सिस्टम
पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में तेजी आई है लेकिन पश्चिमी राजस्थान तक सिस्टम का असर नहीं पहुंच रहा है। दरअसल मध्यप्रदेश के आगे यह धीमा पड़ रहा है जिससे जोधपुर संभाग तक अधिक बारिश नहीं आ रही है। अगले पांच-छह दिनों तक मारवाड़ में मूसलाधार की कोई खास संभावना नहीं है।
मानसून से अधिक प्री मानसून बारिश
- प्रदेश में इस साल मानसून से अधिक प्री मानसून बारिश हुई है।
- एक जून से लेकर 30 जून तक पूरे प्रदेश में 6 प्रतिशत अधिक बारिश थी। पूर्वी राजस्थान में 15 प्रतिशत कम, जबकि पश्चिमी राजस्थान में 36 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।
- मानसून आने के बाद अब 1 जून से लेकर 27 जुलाई तक प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसमें भी सर्वाधिक सूखा पूर्वी राजस्थान ही है जहां 26 प्रतिशत कम बरसात है। पश्चिमी राजस्थान में केवल सात प्रतिशत ही कम बरसात है।
झालावाड़ को छोडकऱ 22 जिले में औसम से कम बारिश
- 23 जिले मौसम विभाग पूर्वी राजस्थान में गिनता है
- 3 प्रतिशत औसत से अधिक बारिश हुई है झालवाड़ में
- 22 जिलों में औसत से कम बारिश है
- 45 प्रतिशत सबसे कम बारिश अजमेर में है
- 10 जिले हैं पश्चिमी राजस्थान में
- 3 जिलों में औसत से अधिक बारिश
- 51 प्रतिशत कम बारिश हुई है नागौर में
- 33 में से केवल 5 जिलों में औसत से अधिक बारिश है
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