जोधपुर. किसान अधिक पैदावार लेने के चक्कर में अंधाधुंध यूरिया का प्रयोग कर रहा है। जिससे साल दर साल मिट्टी में पोषक तत्वों की लगातार कमी होती जा रही है। यूरिया ने कई गुणा पैदावार बढ़ाकर किसानों को गदगद किया, वही अब उन्हे खून के आंसू रुला रहा है। इस कारण मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन की जबदस्त कमी हो गई है। नाइट्रोजन की मिट्टी में कमी काफी चिंताजनक है। मृदा परीक्षण केन्द्र में वर्ष २०२०-२०२१ में ५ हजार २८४ मिट्टी के नमूनों की जांच के बाद इस स्थिति का खुलासा हुआ है। ९८ प्रतिशत मिट्टी के नमूनों में नाइट्रोजन की भारी कमी पाई गई है।
नाइट्रोजन की ९८ व जिंक व आयरन की ८० प्रतिशत की कमी
मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में वर्ष २०२०-२०२१ में ५ हजार २८४ व २०१२-२०२२ में ६५१ मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। जिसमें से ९८ प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन की भारी कमी पाई गई है। इसी तरह से जिंक व आयरन की भी ८० प्रतिशत नमूनों में कमी पाई गई।
पौधों की ग्रोथ रुक जाती है
मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी से फसलों के पौधों की ग्रोथ रुक जाती है। पौधे सूरज के प्रकाश में सही तरीके से अपना भोजन तैयार नहीं कर पाते है। तने की लम्बाई भी घट जाती है।
आयरन व जिंक की कमी से यह असर होता है
आयरन की कमी से पत्ती पीली हो जाती है। पौधों की ऑक्सीजन नहीं मिलता है। पौधे सूखने लगते है। जिंक की कमी से के कारण भी पौधे की ऊंचाई व बढ़वार रुकती है। पत्तियों का रंग हल्का होता है।
पौधे के बेहतर विकास के लिए १६ प्रमुख पोषक तत्वों की जरुरत
पौधे के बेहतर विकास के लिए १६ पोषक तत्वों की जरुरत होती है। इनमें से तीन पोषक तत्व कार्बन, हाईड्रोजन तथा आक्सीजन वायु मंडल और पानी से मिलते हे। अन्य १३ पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैगनीज, बोरान, व मालीब्डेनम व क्लोरीन जमीन से मिलते है।
नाइट्रोजन की ९८ व जिंक व आयरन की ८० प्रतिशत की कमी
किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। जिसमें ९८ प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन की कमी पाई गई। जिंक व आयरन सूक्ष्म तत्वों की भी मिट्टी के नमूनों में ८० प्रतिशत की कमी पाई गई है। यूरिया के अधिक प्रयोग से यह स्थिति पैदा हुई है।
प्रेमसिंह भाटी, कृषि अनुसंधान अधिकारी ( रासायन ) जोधपुर
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