NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 11 जुलाई से गुप्त नवरात्रि शुरू होकर 18 जुलाई को समाप्त होंगे। शास्त्रों में कुल 4 नवरात्रियां शरद, चैत्र, माघ और आषाढ़ नवरात्रि मानी गई है। इनमें से माघ और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के साथ 10 महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजन किया जाता है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा को गुप्त रखा जाता है, इससे पूजा का फल दोगुना मिलता है। कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 5.31 से 7.47 बजे तक व अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 11.59 से 12.54 बजे तक की जा सकती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस नवरात्र में ध्यान-साधना शीघ्र फलदायी भी मानी जाती है। साधकों की ओर से नवरात्रि में मां आद्यशक्ति की दस महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगुलामुखी, मातंगी और कमला देवी पूजा की जाती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
गुप्त नवरात्र में घट स्थापना शुभ मुहूर्त
नवरात्रि शुरू - रविवार 11 जुलाई
नवरात्रि समाप्त - रविवार 18 जुलाई
कलश स्थापना मुहूर्त-
सुबह 5.31 से 7.47 बजे तक
अभिजित मुहूर्त में दोपहर 11.59 से 12.54 बजे तक
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