रोते हुए पोते को चुप कराने के लिए अफीम की घुटी दे देते हैं दादाजी

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जोधपुर. धोरों में बसे बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव में डेढ़ साल के बच्चे को चुप कराने के लिए उसके दादाजी हथेली पर अफीम लेकर चटा दिया करते थे। तीन साल तक लगातार अफीम लेने से बच्चे की लत पड़ गई। बगैर अफीम उसकी हालत खराब होने लग गई। वहां सरकारी अस्पताल में दिखाने पर 5 साल के बच्चे का इलाज किया गया। साथ ही दादा की भी अफीम छुड़ाई गई। मारवाड़ व मेवाड़ के गांवों में परंपरा और प्रतिष्ठा के नाम पर ग्रामीण अपने छोटे बच्चों को भी इसकी लत लगा रहे हैं। ऐसे कुछ मामले सरकारी अस्पतालों में सामने आए हैं।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से एम्स दिल्ली द्वारा दिसम्बर 2017 से अक्टूबर 2018 तक देश के 36 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश में किए गए सर्वे में भी प्रदेश में प्राकृतिक अफीम के अधिक नशे पर मोहर लगा दी है। इसके परिणाम कोरोना से ठीक पहले 2019 में जारी किए गए।

अफीम लेने में 30 वें स्थान, इलाज की जरुरत में 9 वें स्थान पर सर्वे में
देश के 136 जिलों के 4 लाख 73 हजार 569 घरों पर सर्वे किया गया। इसके अलावा 135 जिलों में 72 हजार 642 नमूने अवैध ड्रग के संबंध में लिए गए। देश में 2.1 प्रतिशत लोग अफीम का नशा करते हैं। इसमें से 1.14 प्रतिशत हेरोइन, 0.96 प्रतिशत फार्मास्यूटिकल ड्रग और 0.52 प्रतिशत सीधी अफीम शामिल है। राजस्थान में 1.48 प्रतिशत लोग अफीम लेते हैं। अफीम लेने के मामले में केरल, झारखण्ड, गुजराज, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडू और बिहार ही राजस्थान से नीचे हैं। यहां 90 प्रतिशत प्राकृतिक अफीम ली जाती है। सिंथेटिक अफीम यानी हेरोइन को अफीम के तौर लेने वालों की संख्या बहुत कम है। सर्वे के मुताबिक देश भर के 8.50 लाख लोगों में से राजस्थान में केवल 4 हजार 522 लोग ही इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले मिले। अफीम का नशा करने वालों में भले ही राजस्थान की स्थिति अन्य राज्यों से ठीक हो लेकिन नशे के आदी यहां सर्वाधिक है। अफीम से इलाज की जरुरत के मामले में राजस्थान 9वें नम्बर पर है। पंजाब और उत्तरप्रदेश के लोगों को इलाज की सर्वाधिक दरकार है।

77 लाख लोगों में अफीम का डिसऑर्डर, आधे राजस्थान सहित 8 राज्यों में
सर्वे के मुताबिक देश में 77 लाख लोग अफीम डिसऑर्डर का शिकार है। इसमें आधे उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंधप्रदेश और गुजरात में है।

एल्कोहल और केनाबिस के मामले में अन्य राज्यों से ठीक
नशे को तीन प्रकार में बांटकर सर्वे किया गया। पहला एल्कोहॉल, दूसरा केनाबीस (भांग, गांजा, चरस) और तीसरा अफीम (हेरोइन, दवाइयां, प्राकृतिक अफीम, डोडा) था। देश की 14.6 प्रतिशत आबादी शराब पीती है, जबकि राजस्थान में केवल 2.1 प्रतिशत ही शराब पीते हैं। राजस्थान से कम केवल बिहार (0.9) और लक्षदीप (0.2) में शराबी है। देशभर के 2.7 शराब के आदी है जबकि राजस्थान में 0.60 प्रतिशत आदी है। देश में केनाबीस का नशा 2.8 प्रतिशत जबकि राजस्थान में 0.18 प्रतिशत है। इसमें 2 प्रतिशत लोग भांग और 1.2 प्रतिशत चरस, गांजा लेते हैं।

देश के टॉप शराबी राज्य
राज्य का नाम ---- आबादी में प्रतिशत
छतीसगढ़ ------ 35.6
त्रिपुरा ------ 34.60
पंजाब ------ 28.5
अरुणाचल प्रदेश ------ 28
गोवा ------ 26.4
(राजस्थान में 2.1 प्रतिशत लेते हैं।)
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अफीम लेने वाले देश के टॉप 5 राज्य
राज्य का नाम ------ आबादी में प्रतिशत
मिजोरम ------ 6.90
नागालैण्ड ------ 6.50
अरुणाचल प्रदेश ------ 5.70
सिक्किम ------ 5.10
मणिपुर ------ 4
(राजस्थान में 1.48 प्रतिशत लेते हैं।)
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चरस, गांजा व भांग लेने वाले देश के टॉप 5 राज्य
राज्य का नाम ------ आबादी में प्रतिशत
सिक्किम ------ 7.3
नागालैण्ड ------ 4.6
उड़ीसा ------ 4.5
अरुणाचल प्रदेश ------ 4.2
दिल्ली ------ 3.8
(राजस्थान में 0.18 प्रतिशत लेते हैं।)
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‘हमारे यहां प्राकृतिक अफीम सबसे बड़ा नशा है। भूख लगना, हेल्थ बनाना, काम में मन लगना जैसे टॉनिक के तौर पर अफीम लेने का रिवाज अधिक है। शहरी युवाओं में एल्कोहॉल बड़ा नशा है लेकिन सीधे तौर पर ऐसे लोग अस्पताल नशा छुड़ाना आने से बचते हैं। यह 30 से 40 वर्ष की आयु में अधिक है।’
-डॉ नवरत्न सुथार, मनोविकार विभाग, एम्स जोधपुर



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