हर उम्र में साइकिल रखती है जवां

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जोधपुर. एक जमाना था जब किसी के घर में साइकिल होना स्टेटस सिंबल माना जाता था। चाहे घर से दफ्तर हो या कॉलेज का सफर साइकिल उसे सुहाना बनाने के साथ हेल्दी भी बनाती थी। नब्बे के दशक के बाद साइकिल में गिरावट का कुछ दौर जरुर आया लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढऩे और पश्चिमी देशों द्वारा अपनी महंगी कारों को छोडकऱ साइकिल की तरफ आकर्षित होने पर भारत में भी पिछले दस सालों में साइकिल के क्षेत्र में में फिर से क्रेज देखने को मिला है। जोधपुर में घंटाघर स्थित साइकिल मार्केट में हर रोज भीड़ रहती है। विक्रेताओं का कहना है कि नई-नई साइकिलें बाजार में आने से इनकी डिमाण्ड और बिक्री में भी लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। आज विश्व साइकिल दिवस के मौके पर हम आपको तीन क्षेत्रों के कार्यरत उम्र के एक पड़ाव पर पहुंच चुके व्यक्तियों के बारे में बताते हैं जो कई बार प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं और दिनभर अपना रुटिन काम भी करते हैं।

7 साल तक नेशनल चैंपियन रहे
एंट्रीप्रेन्योर सुनील बख्सी (51) कॉलेज के जमाने से साइकिल चैंपियन रहे हैं। वे लगातार सात साल तक नेशनल चैंपियन रहे। जोधपुर में कई बार इन्होंने साइक्लोथॉन का आयोजन करवाया है। ये कहते हैं कि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं है और साइकिल एक व्यक्ति को ताउम्र स्वस्थ रखती है।

58 साल के निदेशक काजरी का लगाते हैं चक्कर
काजरी के निदेशक डॉ ओपी यादव (58) हर सुबह अथवा शाम को कैंपस में साइकिल चलाते हैं। यहां 50 से अधिक वैज्ञानिक कार्यरत है जो फील्ड में विभिन्न प्रकार की फसलों, फल, सब्जी और उद्यानिकी पर प्रयोग करते हैं। डॉ यादव साइकिल के जरिए ही प्रतिदिन कैंपस का राउण्ड करके फील्ड विजिट करते हैं। वे कहते हैं कि अक्सर 15 से 20 किलोमीटर साइकिलिंग हो जाती है।

हर रोज 50 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं
आर्मी में ऑनरेरी केप्टन पद से सेवानिवृत्त आरएस शेखावत हर रोज 50 से 60 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। शेखावत कहते हैं इससे सभी तरह की बीमारियां काबू में है और दिनभर फ्रेशनैस महसूस होती है। काम में कोई थकान नहीं लगती। लंबी साइकिलिंग का यह फायदा भी हुआ कि अन्य लोग भी प्रेरित हो रहे हैं और साइकिल की तरफ रुझान बढ़ रहा है।

सेना दे रही साइकिलिंग को बढ़ावा
जोधपुर स्थित आर्मी की कोणार्क कोर के तत्कालीन जनरल ऑफिसर इन कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी भारत-पाक 1971 युद्ध की विजय स्वर्ण जयंती के मौके पर जोधपुर से लोंगेवाला साइकिल चलाकर गए थे। ले जनरल पुरी ने फ्रांस में 1200 किलोमीटर साइकिल चलाकर टूअर द फ्रांस प्रतियोगिकता पूरी की। जयपुर स्थित आर्मी की दक्षिणी-पश्चिमी कमान के आर्मी कमाण्डर जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल आलोक क्लेर दिल्ली से जयपुर साइकिल पर आकर जॉइंनिंग दी थी।

3 साल से मनाया जा रहा विश्व साइकिल दिवस
अप्रेल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ मनाने का निर्णय लिया। यह दिवस लेसजेक सिबिल्स्की के कैंपेन और तुर्कमेनिस्तान और 56 अन्य देशों के समर्थन का परिणाम है। साइकिल चलाने के कई सारे फायदे हैं। साइकिल चलाने से वजन कम करने में तो सहायता मिलती है, साथ ही मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी साइकिल चलाना एक बहुत अच्छी क्रिया है। यह वातावरण को प्रदूषण मुक्त रखने में सहायक है। साथ ही साइकिल चलाने में किसी प्रकार के ईधन का भी खर्च नहीं होता है। कई लोगों को तो साइकिल चलाने का शौक भी होता है। इसे शरीर के लिए की जाने वाली श्रेष्ठ कसरतों में से एक माना जाता है।



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