जोधपुर. हैकर्स ने घर बैठे ऑनलाइन कार्य कर रहे सरकारी और निजी कर्मचारियों के कम्प्यूटर के डाटा पर भी सेंध लगा दी है। हैकर्स ने रिमोट डेस्कटॉप एप्लीकेशन एनीडेस्क का फर्जी क्लोन तैयार कर इसमें मालेवयर डाला है, जो कम्प्यूटर से डाटा चुराकर भेज रहा है। यह मालवेयर करीब डेढ़ महीने पहले 21 अप्रेल को सामने आया।
कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन में अधिकांश सरकारी और निजी कर्मचारी अपने वर्क फ्रॉम होम हैं। घर बैठे कम्प्यूटर/लेपटॉप/टेबलेट में कोई तकनीकी समस्या आने पर हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर प्रदाता कंपनी अथवा संबंधित कर्मचारी के दफ्तर में कार्यरत आइटी टीम को सिस्टम एक्सेस देने के लिए एनी डेस्क डाउनलोड करना पड़ता है। इसके जरिए दूर बैठा व्यक्ति आपका कम्प्यूटर एक्सेस करके उसमें कार्य कर सकता है।
पहली बार डाउनलोड करने वालों को समस्या
जानकारी के अनुसार हैकर्स ने गूगल को 1.75 डॉलर प्रति क्लिक के अनुसार एनीडेस्क के नाम से विज्ञापन तैयार करके दिया। पहली बार एनीडेस्क डाउनलोड करने वाले जब गूगल पर सर्च करते हैं तो सबसे पहले हैकर्स बनाए मालवेयर युक्त एनीडेस्क एप्लीकेशन का लिंक सामने आ जाता है। यूजर्स जब इसे डाउनलोड करते हैं तो मालवेयर उसके सिस्टम में घुसकर फाइलों की महत्वपूर्ण जानकारी हैकर्स को भेज देता है। इससे कर्मचारियों के कार्यालय का डाटा चोरी होने का भी खतरा है।
आईटी एक्सपर्ट की सलाह
- यूजर्स को संबंधित वेबसाइट का उपयोग करके ही कोई भी सॉफ्टवेयर डाउनलोड करना चाहिए।
- बिना किसी उचित कारण के गूगल विज्ञापनों पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
- गूगल केवल संबंधित की-वर्ड के बारे में जानकारी देता है। सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता के बारे में मौन रहता है।
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‘गूगल लिंक की बजाय वेबसाइट से एनीडेस्क डाउनलोड करें, कोई समस्या नहीं होगी। गूगल को सूचना मिलने के बाद संभवत: उसके वह ऐड हटा दिया होगा।’
- प्रिया सांखला, सॉफ्टवेयर इंजीनियर
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