NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. ज्योतिष में सौरमंडल के राजा सूर्य 15 जून को वृषभ राशि से निकल कर बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करने के बाद 16 जुलाई तक विद्यमान रहेंगे। उसके बाद कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। सूर्य ग्रह के इस राशि परिवर्तन का शुभ-अशुभ असर सभी राशियों पर पड़ेगा। सूर्य का गोचर 15 जून को सुबह 6.17 मिनट पर होगा। ज्योतिष विज्ञान में सूर्य को सत्ता शक्ति का प्रतीक माना जाता है और बुध को बुद्धि तथा मंगल को साहस का कारक माना गया है। ऐसे में इन तीनों ग्रहों का राशि परिवर्तन सभी राशि वालों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। सूर्य देव जगत की आत्मा के कारक हैं। धरती पर ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत भी सूर्य है।
मान-सम्मान, यश, उच्च पद-प्रतिष्ठा, आदि का कारक ग्रह
सिंह राशि के स्वामी सूर्यदेव को ज्योतिष में मान-सम्मान, यश, उच्च पद-प्रतिष्ठा, आदि का कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिष विज्ञान में सूर्य का राशि परिवर्तन एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। जिसका प्रभाव सभी राशि के जातकों पर पड़ता है। सिंह राशि के स्वामी सूर्य तुला राशि में नीचराशि तथा मेष राशि में उच्चराशिगत संज्ञक माने गए हैं। उच्च भाव में ग्रह अधिक मजबूत और बलशाली होते हैं। जबकि नीच राशि में ये कमजोर हो जाते हैं।
सूर्य का शुभ-अशुभ प्रभाव
सूर्य के शुभ प्रभाव से नौकरी और व्यवसाय-उद्योग में तरक्की के योग बनते हैं और नेतृत्व करने का मौका भी मिलता है। सूर्य को आत्माकारक ग्रह कहा गया है। इसके प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है। पिता, अधिकारी और शासकीय मामलों में सफलता भी सूर्य के शुभ प्रभाव से मिलती है। वहीं सूर्य का अशुभ प्रभाव असफलता देता है। जिसके कारण कामकाज में रुकावटें और परेशानियां बढ़ती हैं। धन हानि, स्वास्थ्य संबंधी रूकावटें और स्थान परिवर्तन भी सूर्य के कारण होता है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इसके लिए प्रभावित जातक को भगवान श्री विष्णु की उपासना, जन्मदाता का सम्मान व भगवान सूर्य की स्तुति आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना लाभदायक है।
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