NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. जंगल, तालाब, पहाड़, नालों व गोचर भूमि पर अतिक्रमण के बाद जोधपुर शहर की लाइफ लाइन रहे प्राचीन जलाशयों की नहरों को अंधाधुंध तरीके से नेस्तनाबूद किया जा रहा है। भूतेश्वर वन क्षेत्र की पहाडिय़ों से होकर वर्षाजल भंडलाव, सिवांचीगेट कब्रिस्तान के पीछे, सिवांचीगेट चौराहा, जालोरी बारी होकर बाईजी तालाब पहुंचता था। अब इसी नहर के उद्गम स्थल भूतेश्वर वन क्षेत्र की पहाडिय़ों पर अंधाधुंध अतिक्रमण से प्राचीन नहर का वजूद खत्म होने के कगार पर है। नहर को जगह-जगह से क्षतिग्रस्त कर मलबा डालकर खत्म किया जा रहा है। नहर के बहाव क्षेत्र में कई लोग अस्थाई मकान बनाकर रहने लगे हैं। अतिक्रमियों को बिजली, सड़क व अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। वन क्षेत्र होने के बावजूद सीमेन्ट-कंक्रीट का जाल फैलता जा रहा है लेकिन कोई रोकने वाला नहीं है।
हर साल बारिश में सड़कों पर पानी भरने का कारण
प्राचीन नहरों से छेड़छाड़ का नतीजा हर साल बारिश में सड़कों पर तालाबनुमा बनने का खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ता है। नहरें क्षतिग्रस्त होने से पहाडिय़ों से आने वाला वर्षा जल का बहाव नहरों की जगह सड़कों पर आता है और पूरे शहर को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। भूतेश्वर वन क्षेत्र की नहरें क्षतिग्रस्त होने से तेज बारिश के दौरान प्रतापनगर और सिवांचीगेट मार्ग पूरी तरह ठप हो जाता है। कई बार तो दो-तीन दिन तक पानी का भराव सड़कों पर रहता है। जबकि प्रतापनगर सिवांचीगेट मार्ग शहर के उम्मेद अस्पताल व अन्य प्रमुख अस्पतालों तक पहुंचने के लिए सबसे सहज व करीबी रास्ता माना जाता है।
खत्म हो रहा वन्यजीव व सरिसृप का प्राकृतवास
ऐतिहासिक जलाशयों में वर्षा जल की आवक के लिए बनी नहर प्रणाली को छिन्न-भिन्न करने का नतीजा हर साल पूरे शहरवासियों को जगह-जगह पानी के भराव के रूप में भुगतना पड़ता है। भूतेश्वर नहर का कुछ कैचमेंट एरिया अभी तक सुरक्षित है। लेकिन अंधाधुंध अतिक्रमण से यह भी खत्म हो जाएगा। अतिक्रमण के कारण भूतेश्वर वन क्षेत्र में रहने वाले वन्यजीव सरिसृप के प्राकृतवास भी लगातार खत्म होते जा रहे हैं। वर्षा जल अपने नियत स्थान भूतनाथ तक तो अभी पहुंचता है लेकिन नहर जगह-जगह बंद होने से वर्षा जल का वेग प्रतापनगर की ओर से चला जाता है।
-शरद पुरोहित, पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3zmMBb7
0 comments:
Post a Comment