जोधपुर। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू की याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक टल गई। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि क्या आसाराम को अग्रिम उपचार के लिए प्रकाश दीप इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक साइंस रायवाला में स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।
राज्य सरकार ने शीर्ष कोर्ट में मंगलवार सुबह ही अपना जवाब दाखिल किया, जिसे देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को प्रतिवाद में अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए सुनवाई टाल दी। राज्य ने अपने जवाब में आसाराम बापू द्वारा चिकित्सा उपचार के लिए सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करने की याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि वह चिकित्सा उपचार की आड़ में अपनी हिरासत की जगह बदलना चाहता है। आसाराम ने पहले अपनी बीमारियों के एलोपैथिक उपचार के लिए जमानत मांगी थी, जबकि अब एक आयुर्वेद केंद्र में इलाज के लिए प्रार्थना की है, क्योंकि उन्हें पहले की याचिकाओं में राहत नहीं मिली थी।
जवाब में पिछले दो मामलों का हवाला देते हुए कहा गया कि आसाराम ने चिकित्सा उपचार की आड़ में अपनी सजा को निलंबित करने का तीसरा प्रयास किया है। इससे पहले 2016 में, सात डॉक्टरों की एक समिति ने जांच के बाद कहा था कि उन्हें सर्जरी की आवश्यकता नहीं थी। जोधपुर के अस्पताल द्वारा जारी 17 फरवरी, 2021 मेडिकल रिपोर्ट में आसाराम को कोरोनरी एंजियोग्राफी की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। एम्स, जोधपुर द्वारा 21 मई को जारी की गई डिस्चार्ज रिपोर्ट के अनुसार भी आसाराम उपचार के प्रति असहयोगी रहे और उन्होंने इंजेक्शन और मौखिक दवाएं लेने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार ने जोधपुर में ही याचिकाकर्ता को यह कहते हुए उपचार प्रदान करने की पेशकश की है कि जोधपुर में एलोपैथिक और आयुर्वेद दोनों में उत्कृष्ट उपचार उपलब्ध हैं।
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