जोधपुर।
कभी पाव भाजी, कभी कबूली और फ्रूट क्रीम भी। यह किसी शादी-समारोह का मैन्यू नहीं बल्कि घर की रसोई का वह स्वाद है जो कुछ दोस्त मिलकर पकाते हैं और फिर शहर की कच्ची बस्तियों में घूम-घूम कर बांटते हैं। ऐसा वे उन लोगों के लिए कर रहे हैं जिनके घरों तक सरकारी मदद, इंदिरा रसोई या कोई अन्य भामाशाह नहीं पहुंच पा रहे हैं।
यह घर की रसोई तैयार होती है गांधी दर्शन समिति के संयोजक अजय त्रिवेदी के निवास पर। कुछ पड़ोसी, कुछ उनके मित्र और परिवार की महिलाएं सुबह से जुट जाते हैं। हर दिन अलग मैन्यु होता है। सभी राशि भी खुद जुटाते हैं और पकाते भी खुद हैं। इसके बाद शाम को 5 बजे बाद 200 से अधिक पैकेट की पैकिंग होकर गाडिय़ां निकल जाती है। झुग्गियों में रहने वाले लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों में यह वितरित किया जाता है। यह क्रम पिछले 10 दिन से अधिक समय से चल रहा है।
परिवार-दोस्त जुड़ते गए
त्रिवेदी ने बताया कि जब घर पर ही रहना था तो कुछ करने की सोची। पहले दिन अपने गांधी दर्शन समिति के दो-तीन दोस्तों के साथ कुछ खाने के पैकेट बनाए और शहर में वितरित करने निकले। कई ऐसे क्षेत्र और लोग चिह्नित किए जिन तक मदद पहुंच ही नहीं रही थी। इसके बाद उनके साथ जगदीश सोलंकी, रणछोड़ पुरोहित, सलीम खान, अनिल गौड़, सुनील भट्ट, इकबाल मौलानी, रविन्द्रसिंह सोलंकी, हुकमसिंह, प्रहलादसिंह, ओंकारसिंह, मांगीलाल, शहजाद, हिमांशु, विशाल शर्मा और प्रीतम शर्मा की टीम जुट गई। परिवार की महिलाएं अंजू, सुनीता के साथ भाई अविनाश भी रसोई बनाने में बेलन-खुरपा संभाल लेते हैं।
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