जोधपुर. पिछले चार-पांच दिनों से शहर में 8 से 10 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के बावजूद वातावरण में धूल कण बहुत कम हैं। हवा में ऑक्सीजन का स्तर संतोषप्रद बना हुआ है। लगातार दूसरे साल जून का पहला पखवाड़ा प्रदूषण रहित गुजरा है। हवाओं की दिशा दक्षिणी-पश्चिमी यानी मानसूनी होने से थार में केवल नमी खींची चली आ रही है। इसमें धूल कण नहीं है। अक्सर मई और जून में पश्चिमी हवाएं चलने के कारण पाकिस्तान और अरब देशों से धूल के कण थार प्रदेश तक आ जाते हैं और वायु भयंकर प्रदूषित हो जाती है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार ऐसी वायु में सांस लेने का खतरा रहता है। कोरोना महामारी में भी सर्वाधिक आवश्यकता शुद्ध ऑक्सीजन की ही है। ऐसे में पिछले साल की ही तरह इस साल भी प्रकृति ने स्वयं ही शहर के लोगों को शुद्ध वायु उपलब्ध करवाई है।
जोधपुर में गत 5 साल में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)
दिन ------2021 ---2020 ---2019 --- 2018 ---2017
12 जून --- 98 --- 108 --- 141 --- 328 --- 209
11 जून --- 101 --- 72 --- 142 --- 259 --- 353
10 जून --- 109 ---96 --- 180 --- 224 --- 145
9 जून --- 117 --- 76 --- 204 --- 186 --- 109
8 जून --- 103 --- 58 --- 244 --- 251 --- 115
(एक्यूआई 50 अच्छा और 100 संतोषप्रद माना जाता है। 101 से 200 एक्यूआई में हवा का स्तर मध्यम, 201 से 300 में खराब, 301 से 400 में बेहद खराब और 401 से 500 के मध्य अलार्मिंग स्थिति मानी जाती है।)
गर्मी तो निकल गई, सर्दी में रहेगी चुनौती
इस साल गर्मी में तो प्रदूषण काफी कम हो गया लेकिन सर्दी अभी चुनौती बनी हुई है। गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) के अनुसार प्रदेश में नवंबर 2019 की तुलना में नवंबर 2020 में 33 प्रतिशत अधिक प्रदूषण रहा। सर्वाधिक प्रदूषित जोधपुर ही रहा। सर्दियों में हवा नहीं बहने से पार्टिकुलेट मैटर हवा में ही निलंबित रहते हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
जोधपुर की सर्दियां सर्वाधिक प्रदूषित
- 55 प्रतिशत अधिक वायु प्रदूषित रही जोधपुर में
- 26 फीसदी वायु प्रदूषिण जयपुर में
- 33 फीसदी अधिक वायु प्रदूषण अलवर व भिवाड़ी में
- 6 फीसदी वायु प्रदूषण पाली में
- 33 फीसदी प्रदूषण रहा कोटा में
- 8 फीसदी प्रदूषण रहा अजमेर में
(सीएसई के अनुसार यह नवम्बर 2019 की तुलना में नवम्बर 2020 में हवा की स्थिति बताता है। अब 2021 की सर्दियों का इंतजार है।)
पर्यावरण सुधार को मिले 31 करोड़
हवा में अत्यधिक धूल कणों के कारण जोधपुर विश्व के टॉप 20 प्रदूषित शहरों में शामिल रहा है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने शहर की हवा को स्वच्छ करने के लिए करीब 62 करोड़ रुपए का फण्ड मंजूर किया है। हाल ही में नगर निगम को इसमें से 31 करोड़ की पहली किस्त प्राप्त हुई है। इससे नगर निगम शहर में वर्टिकल गार्डन, डिवाइडर पर पौधे, खुले क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट, स्मॉग गन स्थापित करने के साथ कई जगह फव्वारें लगाएगा।
नगर निगम ऐसे शुद्ध करेगा शहर की हवा
- 90 लाख की लागत से टाउन हॉल के पास बनेगा वर्टिकल गार्डन
- 3 करोड़ में खरीदी जाएगी रोड स्वीपिंग मशीनें
- 2 करोड़ रुपए में शहर में बनेगा ग्रीन बफर क्षेत्र
- 9 करोड़ रुपए में सडक़ों के गड्डों का होगा उपचार
- 2 करोड़ में वेस्ट रिसाइकलिंग
- 1 करोड़ रुपए से शहर के प्रदूषित इलाकों में लगेगी एंटी स्मॉक गन
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