सोलर पार्क के लिए अडाणी को 1452 बीघा भूमि का आवंटन रद्द

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जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मैसर्स अडाणी रिन्युबल एनर्जी पार्क राजस्थान लिमिटेड को सोलर पार्क के लिए जैसलमेर जिले के नेड़ान गांव में आवंटित 1452.13 बीघा जनोपयोगी प्रयोजनार्थ भूमि का आवंटन तत्काल रद्द कर दिया है। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक कंपनी को भूमि का कब्जा नहीं सौंपा था। कोर्ट ने राज्य को नेड़ान सहित जोधपुर जिले के नागणेची नगर तथा उग्रास गांव में एस्सेल सौर्य ऊर्जा कंपनी राजस्थान लिमिटेड को आवंटित भूमि का सर्वेक्षण करने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि आवंटित भूमि का कोई भाग सार्वजनिक प्रयोजनार्थ पाया जाता है तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाए।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने तीन विशेष अपीलें आंशिक स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को तीनों गांवों में दो कंपनियों को आंवटित भूमि की समीक्षा करने को कहा है। सरकार को यह देखना होगा कि अपीलार्थियों की भूमि, अन्य खातेदार काश्तकारों एवं जनोपयोगी सेवाओं की भूमि के आसपास किए गए आवंटन से काश्तकारों एवं निवासियों के अधिकार प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे हैं या नहीं। खंडपीठ ने निर्देश दिए कि खातेदार काश्तकारों, ग्रामीणों और सार्वजनिक उपयोगिता वाली भूमि का लाभकारी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसे भूभाग को आवंटित भूमि से बाहर किया जाए और ऐसी भूमि को उस सीमा तक कंपनियों को किए गए आवंटन से रद्द कर दिया जाए। खातेदार काश्तकारों की जमीन तथा निवासियों की ढाणी तक एप्रोच रोड के लिए भूमि को विशेष रूप से अलग किया जाए और राजस्व रिकॉर्ड में उस उद्देश्य के लिए दर्ज किया जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह पूरी कवायद छह सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है।

गौरतलब है कि अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने नेड़ान गांव में हुए आवंटन को चुनौती देते हुए कहा कि पोकरण के उपखंड अधिकारी ने वर्ष 2006 में कृषि प्रयोजनार्थ पात्र कृषकों से भूमि आवंटन के लिए आवेदन मांगे थे। बंजर भूमि नहीं होने के कारण इस भूमि का केवल कृषि प्रयोजनार्थ उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि भूमि की किस्म बारानी है। जबकि राज्य अक्षय ऊर्जा निगम ने नेड़ान गांव की 6115 बीघा भूमि मैसर्स अडाणी रिन्युबल एनर्जी पार्क राजस्थान लिमिटेड को आवंटित करने की सिफारिश की। इसके आधार पर राजस्व विभाग ने 30 मई, 2017 को भूमि की किस्म बारानी से बदल कर इसे एनर्जी पार्क के लिए आवंटित करने की स्वीकृति दे दी। नागणेची नगर तथा उग्रास गांव के किसानों को इस बात पर एतराज था कि दशकों से खेती करने के बावजूद उनके पक्ष में भूमि का नियमन नहीं करते हुए कंपनियों के पक्ष में आवंटन कर दिया गया। कंपनियों को जनोपयोगी प्रयोजनार्थ भूमि भी दे दी गई, जबकि इनका आवंटन प्रतिबंधित है।



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