जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में कोविड—19 प्रबंधन से जुड़े मामलों की सुनवाई के सीधे प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) के लिए दायर जनहित याचिका पर रजिस्ट्रार जनरल और प्रमुख विधि सचिव से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
न्यायाधीश संदीप मेहता एवं न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छवाह की खंडपीठ में याचिकाकर्ता एडवोकेट अर्पित गुप्ता ने कहा कि अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग स्पष्ट रूप से सार्वजनिक हित में है और यह खुले न्याय और खुली अदालतों के सिद्धांत का विस्तार है। इससे न्यायिक संस्थानों और न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी लोगों की जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत ‘जानने के अधिकार’ के दायरे में मान चुका है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि अभी हाईकोर्ट में कोविड—19 से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। मौजूदा परिस्थितियों में महामारी से लोगों के जीवन पर भारी असर हुआ है। उनमें व्यापक जनहित का मुद्दा शामिल है। लाइव स्ट्रीमिंग से लोग अदालती कार्यवाही से सीधे जुड़ सकेंगे। इसके अलावा आधारभूत चिकित्सकीय सुविधा, टीकाकरण और ऑक्सीजन की उपलब्धता के संबंध में सरकार और उससे जुड़ी एजेंसियों के प्रयासों के बारे में भी लोग सीधे जान सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट भी स्वप्निल त्रिपाठी के मामले में अदालतों की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए निर्देश जारी कर चुका है।
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