जोधपुर.वैशाखी पूर्णिमा बुधवार को होने वाला चंद्रग्रहण भारत में मान्द्य रूप में होगा। यहां ग्रहण नहीं लगकर चन्द्रबिम्ब विरल छाया में दिखाई देगा। खगोलीय एवं ज्योतिषी गणना के आधार पर यह ग्रहण मान्य नहीं हैं , क्योंकि ग्रहण का समय एवं ग्रहों का अंश तथा कला के आधार पर निरूपित होना दर्शाता है । पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि इस तरह के ग्रहण पर दान-पुण्य, सूतक, स्नान, नियम की कोई मान्यता नहीं होती है। भारतीय समय मे चन्द्रग्रहण दोपहर 2.17 बजे से शुरू होकर शाम 6.22 बजे मोक्ष होगा। ं मोक्ष के समय कुछ राज्यों में अंतिम हिस्सा आएगा नजर ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इसी कारण से जब भी चंद्रमा पर ग्रहण लगता है तो इसका सीधा असर मन पर होता है। चंद्र ग्रहण के समय हवन, यज्ञ, और मंत्र जाप आदि किए जाते हैं। गर्गाचार्य पं. मोहनलाल गर्ग ने बताया कि चंद्रग्रहण रोहिणी संकट भेदन पर 100 वर्षों के बाद होने से इसका प्रभाव संपूर्ण विश्व पर होगा।भारत के उत्तर पूर्वी भागों में चंद्रोदय के समय जब ग्रहण का मोक्ष हो रहा होगा उस समय यह ग्रहण नागालैंड मिजोरम, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, पूर्वी उड़ीसा, अरुणाचल, पश्चिम बंगाल में लोग आंशिक चंद्र ग्रहण का आखिरी हिस्सा ही देख पाएंगे।
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