नि:शुल्क सूची में शामिल न होने से सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रही जांचे

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फलोदी (जोधपुर). कोविड से जीतने के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन शरीर में संक्रमण की स्थिति की जांच के लिए मुख्य टेस्टिंग ही सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रही।

इसका सबसे बड़ा कारण जो सामने आया है वह है कि यह जांचे नि:शुल्क जांच की सूची में शामिल नहीं हैं, सरकार की ओर से इन जांचों की स्वीकृति नहीं है, जिससे कोविड संक्रमण की स्थिति की जांच रिपोर्ट के लिए आवश्यक सीआरपी व डी डाइमर जैसी जांच अस्पतालों में नहीं हो रही है।

इससे रोगियों को कोविड केयर वार्ड से निजी क्लिनिकों तक का सफर करना मुसीबत बना हुआ है। यह भी सामने आ रहा है कि कोविड से जंग लड़ रहे रोगियों का सीआरपी व डीडाइमर टेस्टिंग के लिए अस्पताल से जाना मुश्किल है, ऐसे में निजी लेब संचालक अस्पताल में जांच करने आने के लिए जांच की सरकारी दर से तीन से चार गुना सुविधा शुल्क के नाम पर वसूल रहे हैं। इससे कोविड से जंग लड़ रहे रोगियों को दोहरी मार पड़ रही है।


नोर्म्स में नहीं इसलिए नहीं कर रहे जांच

जानकार सूत्रों के अनुसार विभिन्न अस्पतालों में सीआरपी व डी डाइमर की जांच सुविधा है, लेकिन जांच के लिए आगे से स्वीकृति नहीं होने से यह जांचे नहीं की जा रही हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की ओर से यदि जांच की सुविधा दी जाती है तो कोविड संक्रमण की जांच के लिए सबसे अधिक उपयोगी इन दोनों जांचों को अस्पतालों में शुरु किया जा सकता है।


संक्रमण फैलने का बढ़ रहा खतरा

विशेषज्ञों की माने तो सरकारी अस्पतालों में संचालित कोविड केयर वार्ड में भर्ती कोविड संक्रमितों की जांच अस्पताल में नहीं होने से उन्हें नजदीकी निजी अस्पतालों या निजी लेब पर ले जाना पड़ता है, जिससे यहां आने वाले दूसरे मरीजों में कोविड संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है।

आदेश मिले तो कर देंगे जांच शुरु


अस्पताल में जिन जांचों को करने के आदेश है, उन जांचों को किया जा रहा है। नि:शुल्क जांच की सूची में जो भी है, वे सब जांच की जा रही है। सीआरपी व डी डाइमर की जांच करने के आदेश मिलें तो यह जांचे भी करनी शुरु कर दी जाएंगी।

- अशोक सोनी, प्रयोगशाला इन्चार्ज, जिला अस्पताल, फलोदी


नहीं उठाया फोन

कोविड रोगियों के लिए महत्वपूर्ण व आवश्यक डी डाइमर व सीआरपी की जांचें नहीं करने के सम्बन्ध में जिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ. मधु शर्मा को कईं बार बार फोन लगाया, लेकिन उन्होंने फोन रिसिव नहीं किया।



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