ऑक्सीजन टैंकर खाली करने की जगह नहीं, सर्किट हाउस में खड़े करने पड़ रहे भरे हुए टैंकर

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जोधपुर. एक समय था जब शहर में ऑक्सीजन के एक-एक सिलेंडर के लिए मारामारी मची हुई थी। सिलेंडरों की कालाबाजारी चरम पर थी लेकिन अब शहर में ऑक्सीजन सरप्लस हो गई है। पिछले दो-तीन दिनों से सर्किट हाउस में लिक्विड ऑक्सीजन से भरे हुए दो-तीन टैंकर खड़े हैं। इनकी ऑक्सीजन शहर में खाली करने की कहीं व्यवस्था नहीं होने से इनको सर्किट हाउस में लाकर खड़ा कर दिया गया है। उधर मरीज लगातार कम होने से अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की डिमांड कम हो गई है।

चक्रवाती तूफान तौकते के कारण प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 24 घंटे में जामनगर से 6 टैंकर मंगवाए थे, लेकिन यहां मरीजों की संख्या कम होने से ऑक्सीजन की मांग घट गई। अतिरिक्त ऑक्सीजन शहर में खाली करने की कोई व्यवस्था नहीं होने पर टैंकर ही सर्किट हाउस लाकर खड़े कर दिए गए। अभी भी हर रोज एकाध टैंकर आ जाता है। इसके चलते सर्किट हाउस में लगातार दो-तीन दिनों से टैंकर खड़े रहते हैं।

कभी १०० व्यक्तियों की लाइन, आज केवल पांच
श्रीराम गैस एजेंसी के मनीष भाटी ने बताया कि अप्रेल-मई में उनकी फर्म के बाहर प्रतिदिन 100 से अधिक व्यक्तियों की सिलेंडर रिफिल करवाने की लाइन लगती थी लेकिन आज शनिवार को महज चार पांच व्यक्ति ही सिलेंडर लेने आए। भाटी ने बताया कि ऑक्सीजन की डिमांड कम होने से अब प्रशासन को उद्योगों में ऑक्सीजन शुरू करने का निवेदन किया गया है।

ऐसे घटी आक्सीजन की डिमांड
एम्स जोधपुर: ऑक्सीजन प्लांट प्रभारी राहुल मिश्रा ने बताया कि उनके यहां ऑक्सीजन की डिमांड अभी भी 10.5 टन है। इसका कारण अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीज है। नए मरीज तो घट गए हैं।
एमडीएम अस्पताल: ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभारी ताजाराम चौधरी ने बताया कि पहले जहां 1250 सिलेंडर लगते थे। अब 950 लग रहे हैं।

महात्मा गांधी अस्पताल: ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभारी अरविंद अपूर्वा ने बताया कि पहले 416 किलोग्राम/ घंटा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी वहीं अब यह कम होकर 340 किग्रा/ घंटा रह गई है।



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