जोधपुर। आधार कार्ड के अभाव में पाकिस्तानी विस्थापितों के कोविड टीकाकरण नहीं होने पर चिंता व्यक्त करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पूछा है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी एसओपी की पालना में निर्धारित पहचान पत्र नहीं रखने वाले व्यक्तियों के टीकाकरण के लिए क्या कदम उठाए गए। केंद्र को भी उन लोगों के संबंध में राज्य सरकार के पास टीके की उपलब्धता को लेकर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिनके पास निर्धारित पहचान पत्र नहीं हैं।
न्यायाधीश विजय बिश्नोई और न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ अब शुक्रवार सुबह 9 बजे स्व प्रसंज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई करेगी। कोर्ट ने पाकिस्तानी विस्थापितों के परिवारों में खाद्य संकट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विस्थापितों के पास राशन की अनुपलब्धता का मुद्दा गंभीर है और हमें लगता है कि भोजन की अनुपलब्धता के कारण राज्य में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को भूखा नहीं रहने दिया जा सकता। राज्य में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को राशन उपलब्ध कराना राज्य का कर्तव्य है। जहां तक जोधपुर में रहने वाले पाकिस्तानी अल्पसंख्यक विस्थापितों के लिए राशन की उपलब्धता का संबंध है, कोई विवरण उपलब्ध नहीं होने पर कोर्ट ने राज्य सरकार को जोधपुर में रहने वाले पाकिस्तानी अल्पसंख्यक विस्थापितों को राशन की उपलब्धता के संबंध में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिए हैं। जोधपुर जिला कलक्टर को व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करते हुए विस्थापित परिवारों को तुरंत राशन उपलब्ध करवाने को कहा है।
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र सज्जन सिंह राठौड़ ने कहा कि पाक विस्थापित टीके लगने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इनके पास आधार कार्ड नहीं है। राशन कार्ड के अभाव में इन परिवारों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा। अतिरिक्त महाधिवक्ता करण सिंह राजपुरोहित ने राशन के लिए वर्तमान में किए जा रहे प्रयासों का ब्योरा देने के लिए समय मांगा। टीकाकरण को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से इस संबंध में नीति बनाने का अनुरोध किया है और केंद्र से निर्देश मिलते ही आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। जबकि असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल मुकेश राजपुरोहित ने कहा कि केंद्र सरकार ने 6 मई को ही निर्धारित पहचान पत्र रहित व्यक्तियों के कोविड टीकाकरण पर एक एसओपी जारी कर दी है, जिसमें उन व्यक्तियों के टीकाकरण के संबंध में विस्तृत प्रक्रिया है, जिनके पास निर्धारित पहचान पत्र नहीं हैं। खंडपीठ ने कहा कि निर्धारित पहचान पत्र नहीं रखने वाले व्यक्तियों के कोविड-19 टीकाकरण की प्रक्रिया को केंद्र सरकार द्वारा पहले ही निर्धारित कर दिया गया है। अब टीका लगाने की योजना राज्य और जिला प्रशासन को तय करनी है।
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