राज्य से केंद्र की एसओपी की पालना में विस्तृत रिपोर्ट मांगी, ग्रीष्मावकाश में 3 जून को होगी सुनवाई

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जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वैध पहचान पत्र विहीन लोगों के कोविड टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुपालन करते हुए राज्य सरकार को 3 जून को एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पाकिस्तानी अल्पसंख्यक विस्थापितों के टीकाकरण का मार्ग प्रशस्त हो सके। कोर्ट ने कहा राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले सभी जरूरतमंद पाकिस्तानी अल्पसंख्यक विस्थापितों को राशन सामग्री और भोजन के पैकेट खाद्य आपूर्ति विभाग, स्थानीय निकायों या गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाएं।
न्यायाधीश विजय बिश्नोई और न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल मुकेश राजपुरोहित एवं विपुल सिंघवी ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव का एक शपथ पत्र पेश किया, जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार पहले ही एक विस्तृत एसओपी जारी कर चुकी है, जिनमें निर्धारित पहचान पत्र के अभाव वाले व्यक्तियों के टीकाकरण की प्रकिया हैं। एसओपी के अनुसार जिला टास्क फोर्स संबंधित जिलों में सरकारी विभागों, संगठनों जैसे अल्पसंख्यक मामलों के विभाग, सामाजिक न्याय, सामाजिक कल्याण आदि की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के समूहों की पहचान कर सकती है, जिनके पास कोई भी निर्धारित व्यक्तिगत फोटो आईडी कार्ड नहीं है। चिन्हित समूहों और कवर किए जाने वाले लाभार्थियों की संख्या का राज्य स्तर पर मिलान के बाद टीकाकरण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। अतिरिक्त महाधिवक्ता करण सिंह राजपुरोहित एवं सहयोगी रजत अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान में लगभग 25,000 पाकिस्तानी अल्पसंख्यक विस्थापित राजस्थान में विभिन्न जिलों में रह रहे हैं। जिला प्रशासन स्थिति पर ध्यान दे रहा है और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी व्यक्ति लॉकडाउन की अवधि के दौरान राशन या भोजन से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि एसओपी में पाकिस्तानी अल्पसंख्यक विस्थापितों के बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं है और इसलिए, इनके टीकाकरण के संबंध में केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी एसओपी में निर्धारित पहचान पत्र के बिना व्यक्तियों के टीकाकरण पर विस्तृत दिशा निर्देश हैं और पात्र पाक विस्थापितों को बाहर रखने का कोई कारण नहीं हैं। एसओपी में ऐसे लोगों के समूहों की पहचान के संबंध में कई निर्देश दिए गए हैं, लेकिन राज्य ने ऐसे समूहों की पहचान का कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। इस पर राजपुरोहित ने एसओपी के खंड 5 में दी गई प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक जिले में ऐसे समूहों की पहचान करने के लिए कुछ समय मांगा। कोर्ट ने ग्रीष्मावकाश के दौरान 3 जून को सुबह 9 बजे अगली सुनवाई मुकर्रर की है, उस दिन राज्य को ऐसे समूहों की पहचान करते हुए पात्र पाक विस्थापितों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी है।



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