जोधपुर. मारवाड़ में शीतकाल प्रवास पर आने वाले प्रवासी पक्षी फ्लेमिंगो गंभीर घायल अवस्था में मिलने के बाद उसे जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान के वन्यजीव चिकित्सालय में उपचार के बाद बचाने के प्रयास किए जा रहे है। जिले के बिलाड़ा रेंज के पीपाड़ के पास एक जलाशय के किनारे घायल अवस्था में मिला पक्षी अपने समूह से बिछड़ कर बिजली के तारों में फंसकर घायल हुआ है। रेस्क्यू सेन्टर के वन्यजीव चिकित्सा सहायक महेन्द्र गहलोत के अनुसार
पक्षी के स्वस्थ्य में काफी सुधार है। उसके लिए अलग से केज कि व्यवस्था की गई है । केज में कृत्रिम तालाब बनाया गया है। फ्लेमिंगो बर्ड जमीन पर बैठता नही है। ये अपनी लम्बी टांगों के कारण पानी में या पानी के आसपास ही रहता है।
फ्लेमिंगों वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 में अनुसूची चतुर्थ का पक्षी है। छोटा राजहंस (लेजर फ्लेमिंगो ) राजहंस की एक प्रजाति है जो अफ्रीका के कुछ भागों और भारत के कच्छ तथा चिल्का झील में मुख्य रूप से पाया जाता है। इसका रंग गुलाबी या गुलाबीपन लिए सफ़ेद होता है। यह एक बड़े आकार की चिडयि़ा है और लगभग 90 सेमी ऊंची होती है। सामान्यत: झीलों और आद्र्र-भूमियों के किनारे पाई जाती है। शीतकाल में मारवाड़ के विभिन्न जलाशयों पर भोजन की तलाश में आते है।
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