जयकुमार भाटी/जोधपुर. अपने विचारों और शब्दों को तीसरी कक्षा में पढऩे के दौरान कविता के रूप में पिरोने वाली जोधपुर की बेटी दिव्या जौहरी रेसु ने अपनी पहली किताब ‘लिटिल डू वी नो’ लिखी हैं। जल्द ही यह किताब आप सभी के दिलों को जीतने बाजार में आने वाली है। हैरानी की बात यह है कि रेसु ने गर्भावस्था के दौरान अपनी किताब लिखने का सफर शुरू किया। बचपन से ही स्कूल और घर पर पढऩे का माहौल मिलने से शेक्सपियर, सरोजिनी नायडू व रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं से प्रभावित रहने वाली रेसु जीवन में घटित हर घटना को लिखने लगी। रेसु ने बताया कि मेरी गर्भावस्था के दौरान मेरे लेखन में नई बातें जुड़ती गई। अपने गर्भावस्था के समय भी जब मैंने बेहद ख़ुशी महसूस की उस ख़ुशी को मैंने लिख कर बयान किया। मेरी बेटी का जन्म मेरे कदमों को और मजबूत करता गया। आज मेरे घरवाले तोहफे के रूप में मेरी कविताओं को पाना ज्यादा पसंद करते हैं।
ऐसे हुई किताब की शुरूआत
रेसु ने बताया कि मेरी इस किताब की सबसे बड़ी प्रेरणा मेरी बेटी शिवान्तिका है। क्योंकि मैंने अपनी किताब लिखने की शुरुआत अपने गर्भावस्था में की थी और इस समय जब एक औरत कई तरह की भावनाओं से गुजरती है, जैसे ‘कभी गुस्सा, कभी प्यार, कभी सद्भावना’ तब उसे किसी की जरूरत होती है। मेरे पति ज्यादातर अपने ऑफिस के कार्यों में व्यस्त रहते थे और मैं अकेली होने पर हमेशा अपनी बच्ची से बात करती थी जो उस वक्त मेरे गर्भ में थी। हालांकि मेरे लिखने की चाह और प्रेरणा परिवार के कई सदस्य रहे, लेकिन इस किताब के सफर में सबसे ज्यादा सहयोग मेरे माता पिता का रहा है।
किताब में ये है खास
रेसु ने बताया कि मेरी कविताएं इंसान की भावनाओं को एक किताब में कैद करती हैं। वह एक इंसान की उन भावनाओं का वर्णन करती हैं जो हम इंसान समझकर भी नहीं समझ पातें। मैंने उन सभी भावनाओं को अपनी कविताओं के अंदर पिरोया है। मेरी कविता के चरणों की बात करें तो वह एक घटना के घटने से पहले, बाद और उस समय जो स्थिति होती है, उसे बयान करती हैं। मैंने पोएट्री डे यानी 21 मार्च के दिन इस किताब के बाजार में आने की घोषणा की जब मुझे ऑथर्स कॉपीज मिल चुकी थी। अब ये किताब बाजार में 16 अप्रैल तक आ सकती है।
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