कोरोना संक्रमितों से पहले दिन ही भर गया संक्रामक रोग संस्थान (आईडी सेंटर)

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर। सूर्यनगरी ही नहीं आसपास के गांवों व संभाग के अन्य जिलों में भी कोरोना भयावह रूप दिखा रहा है। जोधपुर स्थित सरकारी व निजी अस्पताल लगभग भर चुके हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन को अस्थाई अस्पताल बनाने की ओर देखना पड़ रहा है। हालात का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि एमडीएम, एमजीएच, एम्स जैसे सरकारी अस्पताल भर जाने के बाद प्रशासन ने शनिवार को संक्रामक रोग संस्थान (आईडी सेंटर) में कोविड सेंटर शुरू किया ता पहले ही दिन सभी पलंग भर गए। अकेले शुक्रवार को ही सरकारी अस्पतालों में १७८ गंभीर संक्रमित भर्ती हुए तो शनिवार को भी यह संख्या इसके आसापास ही रही।
जोधपुर के एम्स सहित तीनों बड़े अस्पतालों में ११८४ मरीज भर्ती हैं और इन अस्पतालों में संक्रमितों को पलंग तक नहीं मिल रहा। गंभीर मरीजों को आईसीयू में जगह के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यही हाल निजी अस्पतालों का। शहर के करीब १५ निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज किया जा रहा है। इन अस्पतालों में कुल ८६७ मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। इनमें से ७६४ पलंग भर चुके हैं। इनमें सिर्फ आईसीयू के २३, ऑक्सीजन वाले ७० और अन्य पांच समेत ९८ पलंग ही खाली हैं।

शुरू होगा बोरानाडा सेंटर
अस्पतालों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन बोरानाडा में कोविड सेंटर वापस शुरू कर रहा है। इसमें ऑक्सीजन वाले २०० व इतने ही अन्य पलंग हैं। विस्तार किया जाए तो यहां ७०० मरीजों को रखा जा सकता है। जिला कलक्टर इंद्रजीत सिंह ने चिकित्सा अधिकारियों के साथ शनिवार को इस सेंटर में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके अलावा रातानाडा स्थित यूथ हॉस्टल, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में नवनिर्मित गल्र्स हॉस्टल व जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में बने कौटिल्य भवन और शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित सामुदायिक केंद्रो को भी अस्थाई अस्पतालों के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

बदलेगी रणनीति
अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने व ठीक हुए मरीजों को शिफ्ट करने की नई रणनीति बनाई जा रही है। जिन मरीजों की स्थिति में सुधार हो चुका है, उन्हें डे-केयर या अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर गंभीर मरीजों को भर्ती करने की नीति पर मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को साथ कलक्टर ने चर्चा की है। इसे अमल में लाने के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों को रोटेशन के आधार पर भर्ती मरीजों की जांच करने का जिम्मा सौंपा जाएगा।

पत्रिका व्यू अगर कोरोना संक्रमण की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले दिनों में बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। अस्पताल भर रहे हैं। गंभीर मरीजों को भी स्ट्रेचर पर अस्पतालों में दाखिले का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑक्सीजन ही नहीं अन्य संसाधनों की भी कमी हो रही है। इसलिए अब सभी को सम्भलना होगा। जनअनुशासन पखवाड़ा में नियमों की पालना, बिना काम घर से न निकलने, मास्क का अनिवार्य इस्तेमाल, कोविड गाइडलाइन की सख्ती से पालना ही हमें संकट के इस दौर से निकाल सकती है। प्रशासन भले ही अस्पतालों में बैड बढ़ा दे, पूरे संसाधन झोंक दे, लेकिन जिस तरह से संक्रमण बढ़ रहा है, वह अच्छा संकेत नहीं है। हमें अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। घर से ही स्वअनुशासन की शुरुआत करें। खुद भी बचें और अन्यों को भी बचाएं।

इनका कहना है...
परिस्थितियां विकट हंै। संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके हालात से निपटने की तैयारी की जा रही है। सभी को समुचित इलाज मुहैया करवाने के लिए अस्थाई अस्पतालों की रूपरेखा भी बना ली गई है।
-इंद्रजीतसिंह, जिला कलक्टर, जोधपुर



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3nkw1Db
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment