तड़प-बेबसी और इंतजार, ऐसे है कोविड सेंटर के हाल

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जयकुमार भाटी/जोधपुर. दोपहर के तीन बजे जब में एमडीएम अस्पताल स्थित जनाना विंग में बने कोविड सेंटर के बाहर पहुंचा तो देखा एक ओर वाहनों की लम्बी कतार लगी हुई थी। वहीं दूसरी ओर प्रवेश द्वार पर एम्बुलेंस व कारों में मुंह पर ऑक्सीजन लगे मरीज लेटे हुए थे। इतने में पॉलीथिन में पैक एक व्यक्ति का शव ट्रॉली पर बाहर लाया गया, साथ में दो युवा विलाप करते हुए आ रहे थे। उन युवाओं की रूलाई ने मुझे भी झकझोर दिया। अपना मन कठोर कर जब मैं अन्दर पहुंचा तो देखा कि कोविड ओपीडी के बाहर लोगों की कतार लगी हुई थी। कुछ लोग इधर-उधर दौड़ते दिखाई दे रहे थे। जगह-जगह मरीज ट्रॉली पर बैठे व लेटे हुए थे। ऐसे में बैड की तरह ट्रॉली भी खाली नही थी। इतने में ओपीडी के बाहर मुंह पर ऑक्सीजन का मास्क लगाए बिलाड़ा से आया एक व्यक्ति ट्रॉली पर बैठा था, उसके पास खड़े एक युवक से पूछा तो बताया कि बैड खाली नहीं होने के कारण तीन घंटे से यही बैठे हुए हैं। चिकित्सक बैड खाली होने पर ही अंदर वार्ड में भर्ती करेंगे। तब तक इंतजार के अलावा और कर भी कुछ नहीं सकतें। उनकी बात सुनकर मैं भी कोविड सेंटर में बने वार्डो की ओर निकल गया।

वहां वार्ड के बाहर के गलियारे में भी बैड लगे हुए नजर आए। जहां बैड पर भर्ती मरीज ऑक्सीजन से गहरी सांसे लेते दिखाई दिए, वहीं बैड के पास जमीन पर बैठे परिजन परेशान दिखाई दिए। उन मरीजों व परिजनों को देख एेसा लगा कि ये कैसा रोग है, जो इतना भयानक है। कोई सांस नहीं आने से परेशान तो कोई गर्मी से परेशान। वहां भर्ती मरीज के साथ उनके परिजन भी दोहरी मार झेलते नजर आए। एक ओर कोरोना की मार तो दूसरी ओर गर्मी की। एेसे में कुछ मरीजों के पास घर से लाए पंखे लगे हुए थे, तो कुछ मरीजों को परिजन पंखी से हवा डाल रहे थे। इतने में वार्ड से बाहर निकले एक दम्पत्ति के चेहरे पर घर जाने की खुशी झलकती दिखाई दी। उनसे पूछने पर बताया कि चार दिन पहले पति व पत्नी दोनों को संक्रमित होने पर भर्ती किया गया था। अस्पताल में दो साल के बेटे की चिंता खाए जा रही थी। अब स्वास्थ्य में सुधार होने पर घर पर होम आईसोलेट किया हैं। जिससे बच्चे की सार-संभाल के साथ खुद के स्वास्थ्य का ध्यान भी रख लेंगे। एेसे में उनके चेहरे पर खुशी की चमक देख मैं भी थोड़ा सुकून महसूस करने लगा और शाम के चार बजने पर काविड सेंटर से उनके पीछे-पीछे बाहर आ गया।



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