जोधपुर. अप्रेल 2020 में पूरा देश लॉकडाउन में था। हाई-वे, स्टेट-वे, गली-मौहल्ले सब सूने थे। तब जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार ने पूरे महीने घर-घर जाकर जोधपुर के लोगों को आटा-दाल, चाय-शक्कर सहित सभी तरह का किराणा सामान पहुंचाया था। कलक्टर के आदेश से प्रतिदिन 60 गाडिय़ां शहर के विभिन्न मौहल्लों में किराणा वितरण करती थी। अब कलक्टर ने भण्डार को गाडिय़ों के डीजल का पूरा भुगतान करने से मना कर दिया है। कलक्टर कार्यालय ने भण्डार से कहा है कि वे केवल कफ्र्यूग्रस्त क्षेत्रों में ही वितरण का भुगतान करेंगे। भण्डार की ओर से 68 लाख का बिल भेजा गया है। इसके एवज में केवल 25 लाख रुपए ही मिले हैं।
10 करोड़ का माल बेचा
भंडार ने अप्रेल 2020 में घर-घर जाकर करीब 10 करोड़ रुपए का सामान एक महीने में ही बेच दिया। इसके लिए बैंक से भी 80 लाख का लोन लिया था। प्रतिदिन जाने वाली 60 गाडिय़ों में सहकारिता विभाग के करीब 100 कार्मिक होते थे। इसमें से 35 कार्मिकों ने बिक्री का 5 लाख रुपए डकार लिया है। एक साल हो गया है लेकिन भण्डार के बार-बार पत्र लिखने के बावजूद सहकारिता विभाग के विभिन्न कार्यालय भण्डार के इन कर्मचारियों व अधिकारियों से वसूली नहीं कर रहे हैं।
11 बजे बाद वितरण को तैयार
‘इस बार लॉकडाउन में 11 बजे तक दुकानें खुली रहती है। इसके बाद हम घर-घर वितरण को फिर से तैयार है, लेकिन हमें पिछला भुगतान भी नहीं मिला है। बहुत घाटा हुआ है।’
मो. हारुन बेलिम, महाप्रबंधक, जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार
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